यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे **आसाराम बापू की अंतरिम जमानत** याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने राजस्थान सरकार को क्यों दी चेतावनी?
सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू बाबा **आसाराम बापू** की सजा के निलंबन और अंतरिम राहत की याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार को कड़ी हिदायत दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की उम्र और बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए इस मामले में किसी भी तरह की देरी ठीक नहीं है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह नहीं चाहती कि किसी भी अप्रिय स्थिति का ठीकरा न्यायपालिका या राज्य सरकार के सिर पर फूटे।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के मुख्य बिंदु:
- मेडिकल ग्राउंड पर जमानत की मांग: आसाराम की तरफ से उनकी गंभीर हृदय बीमारी और बढ़ती उम्र (करीब 85 वर्ष) का हवाला देकर महाराष्ट्र के खोपोली स्थित माधवबाग आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कराने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की गई है।
- राजस्थान सरकार का विरोध: राजस्थान सरकार ने इस याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि आसाराम को जेल के भीतर ही सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं और उचित इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
- अदालत का सख्त रुख: सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने राजस्थान सरकार से कहा कि वे इस मामले को लटकाए नहीं और जल्द से जल्द अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट करें, ताकि याचिका पर अंतिम फैसला लिया जा सके।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि **आसाराम बापू** जोधपुर की जेल में अपने ही आश्रम की एक नाबालिग लड़की के साथ **यौन उत्पीड़न** के गंभीर आरोपों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। पिछले काफी समय से वे दिल की बीमारी और कई अन्य शारीरिक समस्याओं से पीड़ित हैं। इसी के चलते उनके वकीलों द्वारा लगातार मेडिकल बेल की मांग की जा रही है, जिस पर अब **सुप्रीम कोर्ट** ने राजस्थान सरकार को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
(Image Credit: abplive.com)






