पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर बुलडोजर की कार्रवाई के बाद सियासी घमासान मच गया है, जिसके बाद बीजेपी ने उन्हें ‘राजकुमार’ बताकर तीखा तंज कसा है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। इस बार विवाद का केंद्र तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का कार्यालय बना है। कोलकाता में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई के तहत अभिषेक बनर्जी के कैंप ऑफिस के एक हिस्से पर पीला पंजा चला है। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी (BJP) को टीएमसी पर हमला बोलने का एक और बड़ा मौका मिल गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई या सियासी ड्रामा?
वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, स्थानीय निगम प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक द्वेष के तहत नहीं, बल्कि पूरी तरह से नियमों के मुताबिक की गई है। प्रशासन का दावा है कि कार्यालय का कुछ हिस्सा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके बनाया गया था, जिसे हटाने के लिए नोटिस भी दिया गया था।
इस कार्रवाई के तुरंत बाद बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक ममता बनर्जी की सरकार और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है।
बीजेपी ने कसा तंज: “खुद को राजकुमार समझने वाले…”
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बुलडोजर एक्शन पर चुटकी लेते हुए कहा कि बंगाल में कानून सबके लिए बराबर है, चाहे कोई साधारण नागरिक हो या खुद को राज्य का ‘राजकुमार’ समझने वाला कोई रसूखदार नेता। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि:
- कानून से ऊपर कोई नहीं: टीएमसी नेता खुद को कानून से ऊपर समझते हैं, लेकिन इस कार्रवाई ने साबित कर दिया कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई होकर रहेगी।
- भ्रष्टाचार का प्रतीक: बीजेपी ने आरोप लगाया कि बंगाल में सत्ताधारी दल के नेताओं ने हर जगह सरकारी संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है।
- ममता सरकार की लाचारी: बीजेपी का दावा है कि यह कार्रवाई केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए की गई है, जबकि असल अपराधी अभी भी बचे हुए हैं।
टीएमसी का पलटवार: राजनीतिक साजिश का लगाया आरोप
दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पूरी कार्रवाई को बीजेपी के दबाव में की गई साजिश करार दिया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि बीजेपी बंगाल के विकास और पार्टी की लोकप्रियता से डर गई है, इसलिए इस तरह की ओछी हरकतों का सहारा ले रही है। हालांकि, स्थानीय नगर निगम ने साफ किया है कि कानून के दायरे में रहकर ही यह अतिक्रमण हटाया गया है।
अब देखना यह होगा कि बंगाल की राजनीति में बुलडोजर की यह एंट्री आने वाले चुनावों और सियासी समीकरणों पर क्या असर डालती है।
(Image Credit: abplive.com)






