भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए मैच का मजा सिर्फ चौकों-छक्कों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कमेंट्री बॉक्स से आने वाली आवाजें भी खेल का रोमांच दोगुना कर देती हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से क्रिकेट जगत में ‘हिंदी कमेंट्री’ के स्तर और उसके अंदाज को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। इस बहस के केंद्र में आए हैं भारत के दिग्गज पूर्व स्पिनर और मशहूर कमेंटेटर हरभजन सिंह (भज्जी)।
आखिर क्या है हिंदी कमेंट्री का यह पूरा विवाद?
दरअसल, सोशल मीडिया पर अक्सर यह चर्चा होती रहती है कि हिंदी कमेंट्री में अब खेल के गंभीर विश्लेषण (Analysis) से ज्यादा मस्ती-मजाक, वन-लाइनर्स और ‘शायरी’ हावी हो गई है। कुछ फैंस का मानना है कि हिंदी कमेंटेटर अक्सर जरूरत से ज्यादा अनौपचारिक (Informal) भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जो कभी-कभी ‘क्रिंज’ लगने लगती है। वहीं, दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो इस देसी और मजाकिया अंदाज को बेहद पसंद करता है। इसी बीच हरभजन सिंह की कमेंट्री शैली और उनके बयानों ने इस बहस को और हवा दे दी है।
हरभजन सिंह के किस रुख पर मचा है बवाल?
हरभजन सिंह मैदान पर जितने आक्रामक थे, कमेंट्री बॉक्स में भी उतने ही बेबाक नजर आते हैं। जब हिंदी कमेंट्री के गिरते स्तर को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए, तो भज्जी ने इसका खुलकर बचाव किया। हरभजन का मानना है कि भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक त्योहार है, और इसे आम जनता की भाषा में ही परोसा जाना चाहिए। उनके अनुसार, अगर कमेंट्री में थोड़ा मनोरंजन और पंजाबियत का तड़का नहीं होगा, तो दर्शक बोर हो जाएंगे। हरभजन के इस बिंदास रवैये ने फैंस को आपस में भिड़ा दिया है।
सोशल मीडिया पर बंटी क्रिकेट फैंस की राय
माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (ट्विटर) पर फैंस इस मुद्दे को लेकर दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “कमेंट्री का काम खेल की बारीकियों को समझाना है, न कि आपस में बैठकर गप्पें मारना।” वहीं, दूसरे यूजर ने हरभजन का समर्थन करते हुए लिखा, “भज्जी पाजी की कमेंट्री हमें घर जैसा अहसास कराती है, इसमें कोई दिखावा नहीं है।” बहरहाल, इस बहस ने यह तो साफ कर दिया है कि मैच के दौरान कमेंट्री बॉक्स में क्या चल रहा है, इस पर भी दर्शकों की पैनी नजर रहती है।






