लद्दाख आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती हो गए हैं, जिसके बाद CJP ने 20 जुलाई को बड़े मार्च का ऐलान कर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, इस खबर के सामने आते ही लद्दाख से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई है और आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है।
CJP का बड़ा फैसला: 20 जुलाई को देशव्यापी मार्च का ऐलान
सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद सिटीजंस जॉइंट फोरम (CJP) ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है। CJP ने आगामी 20 जुलाई को एक विशाल मार्च का आह्वान किया है। इस मार्च के जरिए केंद्र सरकार पर लद्दाख की मांगों को मानने के लिए दबाव बनाया जाएगा।
आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि यह मार्च शांतिपूर्ण लेकिन बेहद आक्रामक होगा। इसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना।
- क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना।
- स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों और पर्यावरण की सुरक्षा की गारंटी।
- लद्दाख के लिए अलग लोकसभा और राज्यसभा सीटों का आवंटन।
आगे क्या होगा? एक्सपर्ट्स की राय और राजनीतिक विश्लेषण
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक विश्लेषकों और सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत सरकार के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है। एक्सपर्ट्स ने आगे की राह को लेकर तीन महत्वपूर्ण बातें बताई हैं:
1. सरकार पर बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय दबाव: सोनम वांगचुक ग्लोबल आइकॉन हैं। उनकी सेहत बिगड़ने से पर्यावरण और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का ध्यान भारत की ओर आकर्षित होगा, जिससे वैश्विक स्तर पर सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है।
2. आंदोलन का हिंसक होने का खतरा: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने 20 जुलाई के मार्च से पहले कोई ठोस बातचीत शुरू नहीं की, तो लद्दाख के युवाओं में असंतोष उग्र रूप ले सकता है, जिसे संभालना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
3. वार्ता का नया दौर शुरू होने की उम्मीद: गृह मंत्रालय इस मामले को शांत करने के लिए जल्द ही लद्दाख के प्रतिनिधियों को बातचीत की मेज पर बुला सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीच का रास्ता निकालने के लिए सरकार लद्दाख को कुछ विशेष प्रशासनिक अधिकार देने का प्रस्ताव रख सकती है।
(Image Credit: abplive.com)






