यूपी के मैनपुरी में सांपों का कहर इस कदर बरप रहा है कि पिछले 7 महीनों में 194 लोग सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं, जहां अंधविश्वास के चलते लोग जान गंवा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से एक बेहद हैरान और डराने वाली खबर सामने आ रही है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जिले में पिछले सात महीनों के भीतर 194 लोगों को सांपों ने अपना शिकार बनाया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इनमें से कई लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि वे समय पर अस्पताल जाने के बजाय अंधविश्वास के जाल में फंसकर झाड़-फूंक और तांत्रिकों के चक्कर काटते रहे।
अंधविश्वास पड़ रहा जिंदगी पर भारी: अस्पताल छोड़ ओझाओं के पास भाग रहे लोग
मैनपुरी के ग्रामीण इलाकों में आज भी शिक्षा और जागरूकता की कमी साफ देखी जा सकती है। जब भी किसी को जहरीला सांप काटता है, तो परिजन घबराकर डॉक्टर के पास भागने के बजाय स्थानीय ओझा या तांत्रिक की शरण में चले जाते हैं। तांत्रिक पीड़ित को ठीक करने का झूठा दावा करते हैं, और जब तक मरीज की हालत बेहद नाजुक नहीं हो जाती, उसे अस्पताल नहीं ले जाया जाता। यही देरी अक्सर पीड़ित की मौत का मुख्य कारण बन रही है।
आंकड़ों की जुबानी: मैनपुरी में सर्पदंश का खौफनाक सच
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल सांप के काटने की घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है:
- कुल मामले: पिछले 7 महीनों में रिकॉर्ड 194 सर्पदंश के मामले दर्ज किए गए हैं।
- सबसे प्रभावित इलाके: मैनपुरी के ग्रामीण क्षेत्र जैसे कुरावली, किशनी, करहल और घिरोर में सांपों का सबसे ज्यादा आतंक है।
- जागरूकता का अभाव: सर्पदंश के शिकार लगभग 45% लोग पहले स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक कराने की कोशिश करते हैं।
डॉक्टर की चेतावनी: झाड़-फूंक नहीं, ‘एंटी-स्नेक वेनम’ ही बचाएगा जान
मैनपुरी जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के अंधविश्वास में न पड़ें। डॉक्टरों का कहना है कि सांप के काटने के बाद पहला एक घंटा यानी ‘गोल्डन आवर’ सबसे महत्वपूर्ण होता है।
अगर इस दौरान मरीज को सरकारी अस्पताल लाकर एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) का इंजेक्शन दे दिया जाए, तो उसकी जान आसानी से बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में सांप के काटने की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं।
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