लद्दाख के प्रमुख पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई की मांग की है।
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर दिल्ली की तरफ मार्च कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके लगभग 150 समर्थकों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इस कार्रवाई के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने इस हिरासत को पूरी तरह से ‘गैर-कानूनी’ बताते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और मामले की तत्काल सुनवाई करने की अपील की है।
याचिका में क्या की गई है मांग?
सोनम वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर की गई इस हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कोर्ट से निम्नलिखित मुख्य मांगें की गई हैं:
- तत्काल रिहाई: सोनम वांगचुक और उनके साथ हिरासत में लिए गए लद्दाख के अन्य नागरिकों को तुरंत बिना शर्त रिहा किया जाए।
- अवैध हिरासत पर रोक: शांतिपूर्ण मार्च कर रहे नागरिकों को इस तरह हिरासत में रखना मौलिक अधिकारों का हनन है, जिसे तुरंत रोका जाए।
- आपातकालीन सुनवाई: मामले की गंभीरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट इस पर आज ही सुनवाई करे।
आखिर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं सोनम वांगचुक?
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख के सैकड़ों लोग ‘दिल्ली चलो’ पैदल मार्च पर निकले थे। उनकी मुख्य मांगें लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और भूमि की रक्षा से जुड़ी हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
1. लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल किया जाए ताकि वहां के मूल निवासियों को विशेष अधिकार मिल सकें।
2. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
3. स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और पर्यावरण संरक्षण के सख्त नियम लागू किए जाएं।
दिल्ली पुलिस ने राजधानी में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सीमाओं पर निषेधाज्ञा (धारा 163) लागू की थी, जिसके बाद वांगचुक और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया। इस घटना के बाद से ही लद्दाख और देश के अन्य हिस्सों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें दिल्ली हाई कोर्ट के रुख पर टिकी हैं कि वह इस याचिका पर क्या फैसला सुनाता है।
(Image Credit: abplive.com)






