वैश्विक युद्ध और आतंकवाद के बढ़ते खतरों के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह मूक दर्शक नहीं रहेगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सशक्त और निर्भीक विदेश नीति का परिचय देते हुए स्पष्ट संदेश दिया है।
‘मूक दर्शक बने रहने का दौर समाप्त’: विदेश मंत्री
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा पर बोलते हुए कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में किसी भी क्षेत्र में चल रहा युद्ध या संघर्ष केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह जाता। भारत अब वैश्विक घटनाओं पर केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनने वाला एक मजबूत राष्ट्र है। वॉइस ऑफ मैनपुरी के वैश्विक मामलों के विश्लेषण के अनुसार, केंद्र सरकार की दूरदर्शी और ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति ने भारत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। दुनिया को समझना होगा कि आतंक किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए खुला खतरा है।
भारत के कड़े रुख के मुख्य बिंदु:
- आतंकवाद पर ज़ीरो टॉलरेंस: आतंकवाद को पनाह देने और वित्तीय मदद पहुंचाने वालों के खिलाफ बिना किसी समझौते के सख्त वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता।
- वैश्विक शांति और कूटनीति: जारी अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में भारत हमेशा संवाद और शांतिपूर्ण कूटनीति के पक्ष में खड़ा है, लेकिन राष्ट्रीय हितों और मानवीय मूल्यों से समझौता किए बिना।
- ग्लोबल साउथ की आवाज: विकासशील देशों की चिंताओं, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा संकट को प्रमुखता से वैश्विक मंचों पर उठाना।
- सक्रिय नेतृत्व: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत मूक दर्शक बनकर रहने के बजाय संकट समाधानकर्ता (Problem Solver) की भूमिका निभा रहा है।
समाधान की दिशा में अग्रसर भारत
वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के बीच केंद्र सरकार की कूटनीति ने यह साबित किया है कि भारत हर चुनौती को अवसर में बदलने और दुनिया को शांति का रास्ता दिखाने में सक्षम है। विदेश मंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक शांति, सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में और अधिक प्रभावी नेतृत्व प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
(Image Credit: abplive.com)






