वैश्विक वायु गुणवत्ता संकट: लाहौर में स्मॉग का भीषण तांडव, दिल्ली में रोकथाम के लिए प्रशासन मुस्तैद

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दुनिया भर में वायु प्रदूषण का संकट गहरा गया है; लाहौर का एक्यूआई खतरनाक स्तर पार कर शीर्ष पर पहुंचा, जबकि दिल्ली में स्थिति नियंत्रण हेतु कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

सर्दियों की दस्तक के साथ ही दक्षिण एशिया के कई बड़े शहर घने स्मॉग की चपेट में आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी संस्था IQAir के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया है। लाहौर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई स्थानों पर 700 से 1000 के बेहद खतरनाक स्तर को भी पार कर गया, जिसके चलते वहां स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

लाहौर में रिकॉर्ड तोड़ प्रदूषण, दिल्ली में प्रशासनिक सतर्कता

लाहौर के बिगड़ते हालातों के बीच भारत की राजधानी दिल्ली में भी वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है। हालांकि, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्थिति को गंभीर होने से रोकने के लिए केंद्र और राज्य की संबंधित एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) स्थिति पर निरंतर 24 घंटे निगरानी बनाए हुए है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि भौगोलिक स्थिति, मौसमी बदलाव और हवा की धीमी गति के कारण यह मौसमी चुनौती हर साल सामने आती है। जैसा कि वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों और पर्यावरण रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है, इस वर्ष प्रशासन ने पूर्व अनुभवों से सीखते हुए काफी पहले ही व्यापक स्तर पर कार्ययोजना को धरातल पर उतार दिया है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए युद्धस्तर पर उठाए जा रहे कदम

विपक्षी दलों द्वारा प्रदूषण को लेकर की जा रही बयानबाजी को विश्लेषक मात्र ‘राजनीतिक विमर्श’ मान रहे हैं, क्योंकि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रमुख उपाय लागू किए गए हैं:

  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP): स्थिति के अनुसार ग्रैप के विभिन्न चरणों को तत्परता से लागू कर निर्माण कार्यों और धूल नियंत्रण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
  • एंटी-स्मॉग गन और स्प्रिंकलर: प्रमुख चौराहों और संवेदनशील हॉटस्पॉट्स पर आधुनिक एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव की हाई-टेक व्यवस्था की गई है।
  • सड़क धूल प्रबंधन: मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों के जरिए सड़कों की निरंतर सफाई सुनिश्चित की जा रही है ताकि पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को नीचे लाया जा सके।
  • कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग: औद्योगिक उत्सर्जन और कचरा जलाने की घटनाओं पर ड्रोन व सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जा रही है।

क्षेत्रीय चुनौती और सक्रिय समाधान की दिशा

प्रदूषण की समस्या केवल स्थानीय न होकर पूरे उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान के मैदानी इलाकों का एक सम्मिलित मौसमी संकट है। ऐसे समय में प्रशासन का जोर नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने और तकनीक-आधारित दीर्घकालिक समाधानों को लागू करने पर केंद्रित है। सरकार की सक्रिय पहलों और जनता के सहयोग से आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

(Image Credit: abplive.com)

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