भारत ने एससीओ बैठक के लिए पाकिस्तान को औपचारिक न्योता भेजा है। नई दिल्ली में आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर अब पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं।
भारत की परिपक्व विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय दायित्व
वैश्विक पटल पर भारत का नेतृत्व लगातार सशक्त और प्रभावी साबित हो रहा है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नियमों और स्थापित राजनयिक परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को इस उच्चस्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए विधिवत रूप से आमंत्रित किया है। यह कदम दर्शाता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने दायित्वों को अत्यंत संजीदगी और रणनीतिक परिपक्वता के साथ पूरा कर रहा है।
वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाली इस अहम बैठक में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और आर्थिक विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर व्यापक विमर्श होगा। जानकारों का मानना है कि भारत हमेशा से ही बहुपक्षीय मंचों पर सकारात्मक संवाद और विकासोन्मुख एजेंडे को आगे बढ़ाने का पक्षधर रहा है।
SCO बैठक से जुड़े अहम बिंदु
- औपचारिक निमंत्रण: विदेश मंत्रालय की तय कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत इस्लामाबाद को यह आमंत्रण भेजा गया है।
- विकास और सुरक्षा पर जोर: बैठक का मुख्य उद्देश्य यूरेशियाई क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को गति देना है।
- मजबूत नेतृत्व: भारत ने स्पष्ट किया है कि बहुपक्षीय सहयोग अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा पर देश का रुख अडिग रहेगा।
कूटनीतिक संतुलन और भारत की सक्रिय भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष और आलोचकों द्वारा पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर उठाए जाने वाले सवाल महज राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं। वास्तव में, मौजूदा सरकार ने सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम रहते हुए भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की साख को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। अब यह पूरी तरह से पाकिस्तान के पाले में है कि वह इस सकारात्मक वैश्विक मंच का हिस्सा बनता है या दूरी बनाए रखता है।
(Image Credit: abplive.com)






