संसद सत्र शुरू होने से पहले ही सर्वदलीय बैठक में हंगामा खड़ा हो गया। टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर नाराज विपक्ष ने पहले वॉकआउट किया, फिर वापस बैठक में शामिल हुआ।
संसद के आगामी सत्र से ठीक पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सियासी ड्रामा चरम पर पहुंच गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को इस बैठक में आमंत्रित किए जाने से मुख्य विपक्षी दल भड़क गए। कांग्रेस, टीएमसी (मुख्य गुट) और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया और विरोध स्वरूप बैठक से बाहर (वॉकआउट) चले गए।
आखिर क्यों हुआ सर्वदलीय बैठक में इतना भारी हंगामा?
वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, सरकार ने संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए सभी दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था। हालांकि, टीएमसी के आधिकारिक नेतृत्व का आरोप है कि सरकार जानबूझकर उनके बागी और निष्कासित सांसदों को बुलाकर मुख्य विपक्षी एकता को कमजोर करने और उन्हें उकसाने की कोशिश कर रही है।
इस बैठक में हुए विवाद के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- विपक्ष का कड़ा विरोध: विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि बागी और निलंबित सांसदों को बुलाना स्थापित संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है।
- नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक: बैठक कक्ष में विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
- पहले वॉकआउट, फिर वापसी: विरोध दर्ज कराने के लिए विपक्षी नेताओं ने पहले बैठक का बहिष्कार किया, लेकिन बाद में अपनी बात रखने के लिए वे दोबारा चर्चा में शामिल हुए।
संसदीय कार्य मंत्री की सफाई और विपक्ष का रुख
हंगामे के बाद सरकार की ओर से स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत ही सभी दलों और उनके प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है। काफी मान-मनौव्वल और आश्वासन के बाद ही विपक्षी नेता दोबारा बैठक टेबल पर लौटे। हालांकि, सत्र शुरू होने से पहले हुई इस तनातनी ने साफ कर दिया है कि आगामी संसद सत्र बेहद हंगामेदार रहने वाला है और विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।
(Image Credit: abplive.com)






