हिमालय को बचाने की महामुहिम: लद्दाख में केमिकल खाद पर लगा पूर्ण प्रतिबंध, बनेगा देश का पहला ‘मॉडल ऑर्गेनिक क्षेत्र’

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लद्दाख में केमिकल खाद बैन होने के साथ ही इसे भारत का पहला मॉडल ऑर्गेनिक क्षेत्र बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिससे नाजुक हिमालयी तंत्र को बचाया जा सके। वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन ने पर्यावरण और नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब इस पूरे सीमांत क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

हिमालय को बचाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम

लद्दाख का भौगोलिक क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। यहां की मिट्टी और जल संसाधनों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन ने ‘लद्दाख ऑर्गेनिक मिशन’ के तहत यह कड़ा फैसला लिया है। सरकार का लक्ष्य लद्दाख को देश का सबसे स्वच्छ और शुद्ध कृषि केंद्र बनाना है। इसके लिए स्थानीय किसानों को जैविक खेती (Organic Farming) अपनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण और सब्सिडी दी जा रही है।

योजना की मुख्य विशेषताएं और बड़े बदलाव

इस ऐतिहासिक फैसले के तहत लद्दाख प्रशासन द्वारा निम्नलिखित बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:

  • केमिकल खाद पर पूर्ण प्रतिबंध: लद्दाख की भौगोलिक सीमा के भीतर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
  • पारंपरिक जैविक खाद को बढ़ावा: किसानों को गोबर की खाद, केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) और पारंपरिक खाद बनाने के लिए तकनीकी सहायता और अनुदान दिया जा रहा है।
  • ‘लद्दाख ऑर्गेनिक’ सर्टिफिकेशन: यहां उत्पादित होने वाले कृषि उत्पादों को एक विशेष ऑर्गेनिक टैग मिलेगा, जिससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ेगी।
  • पहला मॉडल ऑर्गेनिक रीजन: इस अनूठी पहल के जरिए लद्दाख को देश के पहले संपूर्ण ऑर्गेनिक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया जाएगा।

स्थानीय किसानों और पर्यावरण को मिलेगा सीधा फायदा

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस फैसले से न केवल लद्दाख की भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सिंधु नदी और अन्य ग्लेशियर जनित जल स्रोतों को भी प्रदूषित होने से बचाया जा सकेगा। इसके अलावा, ऑर्गेनिक खेती से लद्दाख के मुख्य कृषि उत्पाद जैसे रक्तसे कारपो खुबानी (Apricot), सेब और औषधीय पौधा सीबकथॉर्न (Seabuckthorn) की ब्रांड वैल्यू वैश्विक स्तर पर कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों की आय दोगुनी होने की उम्मीद है।

लद्दाख प्रशासन का यह ग्रीन मास्टरस्ट्रोक भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल साबित होने जा रहा है।

(Image Credit: abplive.com)

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