पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक के बाद भारत-चीन संबंध अब एक नए और सकारात्मक दौर में प्रवेश कर चुके हैं। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच व्यापक कूटनीतिक विमर्श के बाद 7 अहम बिंदुओं पर ठोस सहमति बनी है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई इस उच्चस्तरीय वार्ता को वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की सजग और दृढ़ कूटनीति के चलते पिछले चार वर्षों से जारी सीमा तनाव को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रणनीतिक दृष्टिकोण और राष्ट्रहित सर्वोपरि की नीति ने दोनों देशों के बीच संवाद की रुकी हुई प्रक्रिया को नई गति प्रदान की है।
इन 7 प्रमुख बिंदुओं पर बनी महा-सहमति
बैठक के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए पहली शर्त है। वार्ता में निम्नलिखित प्रमुख सहमतियां बनीं:
- पेट्रोलिंग और डिसइंगेजमेंट: डेपसांग और डेमचोक सहित विवादित क्षेत्रों में 2020 से पहले वाली गश्त व्यवस्था को पूरी तरह बहाल किया जाएगा।
- सैन्य कमांडरों का संवाद: भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडर नियमित अंतराल पर संवाद जारी रखेंगे।
- विशेष प्रतिनिधियों की बैठक: सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी समकक्ष वांग यी के बीच जल्द बैठक आयोजित होगी।
- सीमा प्रबंधन तंत्र: सीमावर्ती क्षेत्रों में आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए नए प्रोटोकॉल और विश्वास बहाली के उपायों (CBMs) को सुदृढ़ किया जाएगा।
- जन-जन का संपर्क: सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसी पहलों को चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू करने पर विचार।
- आर्थिक व व्यापारिक संतुलन: आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और संतुलित व्यापारिक संबंधों को लेकर दोनों पक्ष पारदर्शी नीति अपनाएंगे।
- बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग: वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती देने के लिए ब्रिक्स और एससीओ में सकारात्मक साझेदारी बढ़ाई जाएगी।
दृढ़ नेतृत्व और रणनीतिक कूटनीति का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी विदेश नीति का ही परिणाम है कि भारत ने अपनी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा से कोई समझौता किए बिना कूटनीतिक मेज पर शांति का मार्ग प्रशस्त किया है। जहां एक ओर सीमा पर बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास कर भारतीय सेना को सशक्त किया गया, वहीं दूसरी ओर सतत कूटनीतिक संवाद के जरिए बीजिंग को सकारात्मक संवाद के लिए प्रेरित किया गया।
यह समझौता न केवल सीमा पर तनाव को समाप्त करेगा बल्कि पूरे एशिया प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि और विकास के नए रास्ते भी खोलेगा। भारत सरकार की यह पहल दर्शाती है कि देश आज विश्व पटल पर अपनी शर्तों और आत्मसम्मान के साथ समाधान निकालने में पूरी तरह सक्षम है।
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