सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होने के बाद देश में हलचल तेज हो गई है। लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है, जिसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें जल्द से जल्द अपने वैज्ञानिक शोध और नवाचार कार्यों में लौटने का आग्रह किया गया है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भी वांगचुक से संपर्क साधा है और लद्दाख के मुद्दों पर बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
सोनम वांगचुक के आंदोलन की मुख्य मांगें
प्रसिद्ध नवोन्मेषक सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। उनके इस आंदोलन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- छठी अनुसूची का दर्जा: लद्दाख की जमीन और जनजातीय संस्कृति को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना।
- पूर्ण राज्य की मांग: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना।
- संसदीय प्रतिनिधित्व: लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटों का गठन करना।
- रोजगार और पर्यावरण: स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण और हिमालयी क्षेत्र में अनियंत्रित औद्योगीकरण पर रोक।
पीएम मोदी की अपील और सरकार का रुख
अनशन समाप्त होने के बाद, केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि लद्दाख की समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण बातचीत से ही संभव है। पीएम मोदी ने वांगचुक के दूरदर्शी विचारों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश को उनके तकनीकी नवाचारों की आवश्यकता है। इसलिए उन्हें अपना स्वास्थ्य सुधारकर जल्द से जल्द अपने पुराने शोध प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करना चाहिए।
फिलहाल, वांगचुक की टीम और केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय समिति के बीच दिसंबर में अगले दौर की बातचीत प्रस्तावित है, जिससे लद्दाख के भविष्य की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है।
(Image Credit: abplive.com)






