पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, जिससे लद्दाख आंदोलन के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम के बाद राजनीतिक विश्लेषक अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया देते हुए आंदोलन की आगे की दिशा स्पष्ट की है।
‘मुझे खुशी है कि अनशन टूटा…’: अभिजीत दीपके
सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विश्लेषक अभिजीत दीपके ने कहा, “मुझे बेहद खुशी है कि वांगचुक जी ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। उनका जीवन और स्वास्थ्य देश व लद्दाख के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि अनशन खत्म होने से आंदोलन समाप्त हो जाएगा। दीपके के मुताबिक, अनशन केवल विरोध प्रदर्शन का एक माध्यम था, जबकि **लद्दाख के अधिकारों की मूल लड़ाई** अब भी जारी है।
लद्दाख आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
लद्दाख के लोग पिछले काफी समय से केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगों को लेकर मुखर हैं। आंदोलन की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) के तहत सुरक्षा देना।
- क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान करना।
- लद्दाख के युवाओं के लिए **स्थानीय रोजगार और नौकरियों** की गारंटी।
- नाजुक हिमालयी पर्यावरण और जनजातीय संस्कृति का संरक्षण।
क्या अब थम जाएगी लद्दाख की आवाज?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होना आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत है। गृह मंत्रालय के साथ आगामी बातचीत में लद्दाख के प्रतिनिधि अपनी मांगों को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूती से उठाएंगे। वांगचुक की सेहत में सुधार होते ही रणनीति के अगले कदम का ऐलान किया जाएगा।
(Image Credit: abplive.com)






