नेपाल में ग्लेशियर फटने (GLOF) के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने सीमावर्ती राज्यों में हाई अलर्ट जारी कर आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।
हिमालयी क्षेत्रों में मंडराता खतरा और भारत की सक्रियता
पड़ोसी देश नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के चलते कई ग्लेशियर झीलों के फटने की आशंका जताई गई है। यदि यह ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) होता है, तो इसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्यों—विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की नदियों पर पड़ सकता है। हालांकि, इस संभावित प्राकृतिक चुनौती से निपटने के लिए भारतीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग (CWC) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने नेपाल सीमा से सटी प्रमुख नदियों—जैसे कोसी, गंडक और घाघरा के जलस्तर पर 24 घंटे उपग्रह आधारित रियल-टाइम निगरानी शुरू कर दी है।
सीमा पार आपदा से निपटने के लिए सरकार का सुरक्षा चक्र
प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों ने समन्वय के साथ एक मजबूत कार्ययोजना तैयार की है। प्रशासन ने न केवल पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) को सुदृढ़ किया है, बल्कि मैदानी स्तर पर भी राहत एवं बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
आपदा प्रबंधन के तहत उठाए गए प्रमुख कदम:
- सैटेलाइट से 24×7 निगरानी: इसरो (ISRO) और CWC मिलकर सीमा पार की सभी संवेदनशील झीलों की स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं।
- NDRF की अग्रिम तैनाती: संभावित प्रभावित तटीय इलाकों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
- सटीक सूचना तंत्र: नेपाल के मौसम विभाग और जल संसाधन अधिकारियों के साथ लगातार कूटनीतिक व तकनीकी स्तर पर डेटा साझा किया जा रहा है।
- तटबंधों की मजबूती: सीमावर्ती क्षेत्रों में नदियों के तटबंधों की त्वरित मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
चुनौतियों के बीच समाधानोन्मुख दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न इस प्रकार की भौगोलिक चुनौतियां बेहद जटिल होती हैं, लेकिन भारत का आधुनिक आपदा प्रबंधन ढांचा किसी भी आपात स्थिति से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सरकार की दूरदर्शी नीतियों और समय रहते उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
(Image Credit: abplive.com)






