मैनपुरी: सरहद पर देश की रक्षा में तैनात एक भारतीय सेना के जवान की पैतृक जमीन विवाद मामले में मैनपुरी जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच और समाधान का भरोसा दिया है।
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और जनसुनवाई प्रणाली के तहत कलेक्ट्रेट पहुंचे जवान की समस्या को जिलाधिकारी ने बेहद गंभीरता से सुना। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में प्रशासनिक तंत्र सैनिकों और आम नागरिकों की समस्याओं के निस्तारण के लिए निरंतर तत्परता से कार्य कर रहा है।
प्रशासनिक संवेदनशीलता: जवान की बात को मिली प्राथमिकता
जनसुनवाई के दौरान पहुंचे सेना के जवान ने प्रार्थना पत्र सौंपते हुए अवगत कराया कि उनकी गैर-मौजूदगी में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा पैतृक भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और पुलिस क्षेत्राधिकारी को मौके पर जाकर पैमाइश कराने तथा दोनों पक्षों की मौजूदगी में निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
मामले में त्वरित कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
- राजस्व व पुलिस टीम गठित: जमीन की सटीक पैमाइश के लिए संयुक्त टीम को निर्देशित किया गया है।
- सख्त हिदायत: किसी भी स्तर पर कानून व्यवस्था से खिलवाड़ या अवैध कब्जे की मंशा पाए जाने पर कठोर विधिक कार्रवाई के आदेश।
- सैनिक कल्याण प्राथमिकता: सीमा पर तैनात जवानों के परिवारों की सुरक्षा व संपत्तियों का संरक्षण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल।
भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख
राज्य सरकार द्वारा भू-माफियाओं और अवैध कब्जेदार तत्वों के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत मैनपुरी प्रशासन लगातार पारदर्शी कदम उठा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आते ही नियमानुसार ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि पीड़ित जवान को समयबद्ध तरीके से न्याय मिल सके।
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