‘माफी मांगें फारूक’: विवादित टिप्पणी पर भड़का चौतरफा आक्रोश, जम्मू-कश्मीर में विकास विरोधी बयानों को देश ने नकारा

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नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला के विवादित बयान पर देशव्यापी आक्रोश भड़क उठा है। भाजपा, विहिप और कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताते हुए माफी की मांग की है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला द्वारा हाल ही में दिए गए बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी रोष देखा जा रहा है। जहां एक ओर केंद्र सरकार की विकासोन्मुख नीतियों के चलते घाटी में शांति, स्थिरता और पर्यटन के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं, वहीं अब्दुल्ला के इस बयान को मुख्यधारा के विकास में बाधा पहुंचाने वाला माना जा रहा है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, इस मुद्दे पर न केवल सत्तापक्ष बल्कि विपक्षी दल भी एक सुर में देश की संप्रभुता के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं।

सियासी दलों का कड़ा रुख: ‘देश की सुरक्षा से समझौता नहीं’

फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता को सर्वोपरि रखने वाले तमाम संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विभिन्न संगठनों का कहना है कि बदलते जम्मू-कश्मीर की सकारात्मक तस्वीर को धूमिल करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): पार्टी प्रवक्ताओं ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अब्दुल्ला का बयान गैर-जिम्मेदाराना है और उन्हें बिना शर्त पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर पूरा देश एकजुट है।
  • विश्व हिंदू परिषद (VHP): विहिप नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब घाटी में तिरंगा शान से लहरा रहा है और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है, तब ऐसे विभाजनकारी बयान देशहित के खिलाफ हैं।
  • कांग्रेस: कांग्रेस नेताओं ने भी राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए अब्दुल्ला की भाषा पर ऐतराज जताया और साफ किया कि देश की संप्रभुता के मामले में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।

शांति और समृद्धि की ओर अग्रसर नया कश्मीर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं। आज घाटी में पथराव और अलगाववाद की घटनाएं अतीत की बात बन चुकी हैं। प्रशासन की सक्रियता और जनहितैषी योजनाओं से आम जनता सीधे तौर पर लाभान्वित हो रही है।

ऐसे समय में पुराने ढर्रे के राजनीतिक बयानों को दरकिनार करते हुए, सुरक्षा एजेंसियां और केंद्र सरकार राज्य को सुरक्षा कवच प्रदान करने और नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए पूरी निष्ठा से जुटी हुई हैं।

(Image Credit: abplive.com)

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