पेपर लीक से बने नेता, अब उसी आग में घिरी कुर्सी! जानिए 1997 के उस आंदोलन की कहानी जिसने धर्मेंद्र प्रधान को बनाया था ‘हीरो’

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान आज NEET और NET पेपर लीक विवाद के कारण भारी दबाव में हैं। दिलचस्प बात यह है कि 1997 में उड़ीसा में हुए पेपर लीक आंदोलन से ही उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी।

1997 का उत्कल विश्वविद्यालय आंदोलन: जब छात्र नेता बने धर्मेंद्र प्रधान

बात साल 1997 की है, जब ओडिशा के प्रसिद्ध **उत्कल विश्वविद्यालय** में प्रश्नपत्र लीक का एक बड़ा मामला सामने आया था। इस घटना ने हजारों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया था। उस वक्त **अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)** के युवा नेता के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने इस धांधली के खिलाफ सड़क से लेकर शासन तक जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

हालिया घटनाक्रम पर वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के मुताबिक, 1997 के उस उग्र आंदोलन ने धर्मेंद्र प्रधान को ओडिशा की छात्र राजनीति का प्रमुख चेहरा बना दिया था। उन्होंने छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी, गिरफ्तारी दी और राज्य सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया। इस आंदोलन से मिली पहचान ने उनके राजनीतिक करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

27 साल बाद बदला इतिहास का पहिया: अब खुद हैं कठघरे में

समय का पहिया ऐसा घूमा कि आज 27 साल बाद **केंद्रीय शिक्षा मंत्री** की कुर्सी पर बैठे धर्मेंद्र प्रधान खुद उसी तरह के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। **NEET-UG 2024** और **UGC-NET** परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्षी दल और छात्र संगठन अब धर्मेंद्र प्रधान के नैतिक इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। जिस ‘पेपर लीक’ के मुद्दे ने उन्हें एक जुझारू छात्र नेता के रूप में स्थापित किया था, आज वही मुद्दा उनके प्रशासनिक कार्यकाल का सबसे बड़ा संकट बन चुका है।

धर्मेंद्र प्रधान का छात्र राजनीति से केंद्रीय मंत्री तक का सफर

  • 1983: तालचर में छात्र राजनीति की शुरुआत की और ABVP में शामिल हुए।
  • 1997: उत्कल विश्वविद्यालय पेपर लीक के खिलाफ ऐतिहासिक छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • 1998: ABVP के राष्ट्रीय सचिव बने।
  • 2000: पहली बार ओडिशा की पल्लाहड़ा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
  • 2024: शिक्षा मंत्री के रूप में **NEET और NET परीक्षा विवाद** का सामना कर रहे हैं।

विपक्ष का हमला और सरकार का रुख

कांग्रेस, वामपंथी दलों और अन्य विपक्षी पार्टियों ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि जो नेता कभी छात्रों के हक की बात करता था, आज लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य पर खामोश बैठा है। वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है और पूरे मामले की जांच **CBI** को सौंप दी है। हालांकि, छात्रों और विपक्ष का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।

(Image Credit: abplive.com)

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