राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इंटरनेट बैन और पाबंदियों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि जनता और प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए ही इंटरनेट सेवाएं ठप की गईं।
दिल्ली के प्रमुख विरोध स्थल जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट नेटवर्क में आई रुकावट के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के मुताबिक, सीजेपी (CJP) और अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवा बाधित होने पर कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार तंत्र का दुरुपयोग कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है।
कांग्रेस का आरोप: ‘विरोध की आवाज से डरती है सरकार’
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोप लगाया कि जब भी कोई जायज मांगों को लेकर जंतर-मंतर पहुंचता है, सरकार डिजिटल नाकेबंदी का सहारा लेती है। उनका दावा है कि इस इंटरनेट बैन का मुख्य मकसद प्रदर्शन की लाइव कवरेज रोकना और जनता तक सच्चाई पहुंचने से रोकना है।
प्रदर्शन के दौरान उठे ये प्रमुख सवाल:
- सूचना का अधिकार बाधित: इंटरनेट बंद होने से आम जनता और मीडियाकर्मियों को जमीनी हालात की जानकारी शेयर करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
- लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला: विपक्षी दलों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्थल पर नेट सेवा बंद करना अघोषित आपातकाल जैसा है।
- पारदर्शिता की कमी: सरकार से मांग की गई है कि वह स्पष्ट करे कि किस आदेश के तहत जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट नेटवर्क को डाउन किया गया।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर गृह मंत्रालय या दिल्ली पुलिस की तरफ से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, इंटरनेट पाबंदी की इस घटना ने एक बार फिर देश में डिजिटल अधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर नई बहस छेड़ दी है।
(Image Credit: abplive.com)






