ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 100 से अधिक सुरक्षा अधिकारी मारे गए, अमेरिका को चेतावनी

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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 100 से अधिक सुरक्षा अधिकारी मारे गए, अमेरिका को चेतावनी

ईरान में जारी व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने देश को गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, हालिया हिंसक झड़पों में देशभर में अब तक 100 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की मौत हो चुकी है। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के खिलाफ हो रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि संसद अध्यक्ष ने अमेरिका और इजरायल को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला किया गया तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा।

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प का दृश्य।

ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, केवल इस्फहान प्रांत में ही 30 पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौत हो चुकी है। वहीं, लॉ एनफोर्समेंट कमांड स्पेशल यूनिट्स के कमांडर ने पुष्टि की कि 8 और 9 जनवरी को विभिन्न शहरों में दंगों को नियंत्रित करने के दौरान आठ सुरक्षाकर्मी मारे गए। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने रविवार को दावा किया कि पूरे देश में अब तक 109 सुरक्षा कर्मियों की जान जा चुकी है।

प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। कई शहरों में सरकारी इमारतों, पुलिस चौकियों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़कों पर आगजनी, नारेबाजी और भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सरकार ने इंटरनेट सेवाओं पर आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं, ताकि सूचनाओं का प्रसार रोका जा सके, लेकिन इसके बावजूद विरोध की आवाज दब नहीं पा रही है।

ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश की मुद्रा लगातार कमजोर हो रही है, महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है और आम जनता की क्रय शक्ति तेजी से गिर रही है। इसी आर्थिक दबाव ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असंतोष का परिणाम है।

इस बीच, ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी। संसद अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने ईरान पर हमला किया, तो जवाबी कार्रवाई केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर असर डालेगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों को भड़काने के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका हो सकती है।

ईरानी सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि प्रदर्शन हिंसक तत्वों द्वारा भड़काए जा रहे हैं, जबकि विपक्षी समूह इसे जनता की वास्तविक पीड़ा की आवाज बता रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है और कई जगहों पर बल प्रयोग किया गया है। हालांकि, सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। पश्चिमी देशों ने ईरान से संयम बरतने और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है, जबकि ईरान इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले, तो यह संकट ईरान की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर लंबे समय तक असर डाल सकता है।

फिलहाल, देश में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव किसी समाधान की ओर बढ़ने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरानी नेतृत्व इस संकट से निकलने के लिए संवाद का रास्ता अपनाता है या फिर सख्ती के जरिए हालात को नियंत्रित करने की कोशिश करता है।


 


 


 

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