केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए तीसरी बार भाजपा सरकार चुनने का आह्वान किया। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के सर्वांगीण विकास और सामाजिक समानता को नई गति देने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
राजधानी में आयोजित एक महत्वपूर्ण जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि कानून के समक्ष हर नागरिक की समानता लोकतंत्र की सबसे बुनियादी शर्त है। उन्होंने जनता से संवाद करते हुए विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश की जागरूक जनता कानून-व्यवस्था, सुशासन और विकास की इस यात्रा को रुकने नहीं देगी।
समान अधिकार और महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम
वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री का यह बयान राज्य में दूरगामी सामाजिक सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। केंद्र व राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार द्वारा पहले से ही संचालित लोक-कल्याणकारी योजनाओं के बीच अब विधिक सुधारों को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। उत्तराखंड के बाद अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इस प्रगतिशील कानून को लागू करने का संकल्प सामने आया है।
अमित शाह ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी वर्ग के विरुद्ध नहीं, बल्कि समाज के हर तबके—विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके उत्थान के लिए अनिवार्य है।
यूसीसी से उत्तर प्रदेश को मिलने वाले प्रमुख लाभ:
- लैंगिक समानता को बढ़ावा: विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और संपत्ति अधिकार में महिलाओं को पुरुषों के समान वैधानिक अधिकार मिलेंगे।
- सामाजिक समरसता और सुशासन: सभी समुदायों के लिए पारदर्शी और समान नियम लागू होने से कानूनी विवादों में कमी आएगी।
- कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक: बाल विवाह और बहुविवाह जैसी पुरानी विसंगतियों का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।
- राष्ट्रीय एकता की मजबूती: एक राज्य-एक कानून के सिद्धांत से सामाजिक सुरक्षा और विश्वास का माहौल और अधिक सुदृढ़ होगा।
सियासी बयानबाजी के बीच विकास के एजेंडे पर अडिग सरकार
विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को राजनीतिक विश्लेषक चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि सरकार का मुख्य ध्येय राज्य को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य बनाना है। उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और सख्त कानून-व्यवस्था के मामले में जो मानक तय किए हैं, यूसीसी उसी शृंखला में सुधारवादी नीति का अगला चरण माना जा रहा है।
प्रशासनिक तंत्र और नीति विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने से विकास की रफ्तार को नई दिशा मिलेगी और राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य की ओर और अधिक तेजी से अग्रसर होगा।
(Image Credit: abplive.com)





