जोशीमठ हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए पूरी तरह एक्शन मोड में आ गए हैं। प्रशासन ने त्वरित जांच शुरू कर कड़े विमानन नियमों की पड़ताल तेज कर दी है।
उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए हेली सेवाएं जीवनरेखा मानी जाती हैं। हाल ही में जोशीमठ क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम के दौरान हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के तुरंत बाद केंद्र व राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव तंत्र को सक्रिय कर दिया। स्थानीय प्रशासन, एसडीआरएफ (SDRF) और राहत दलों ने तुरंत मोर्चा संभाला, जिससे स्थिति को तेजी से नियंत्रित किया जा सका।
खराब मौसम में उड़ान के क्या हैं डीजीसीए (DGCA) के नियम?
पहाड़ी इलाकों में हवाई यात्रा सुरक्षित बनाए रखने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने बेहद कड़े मानक तय किए हैं। वॉइस ऑफ मैनपुरी के विशेष विश्लेषण के अनुसार, नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम बेहद अप्रत्याशित होता है, जिसे देखते हुए सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है:
- वीएफआर (Visual Flight Rules): पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश छोटे हेलिकॉप्टर ‘विजुअल फ्लाइट रूल्स’ के तहत संचालित होते हैं। इसके तहत पायलट को आगे का रास्ता और जमीन स्पष्ट रूप से दिखनी चाहिए।
- न्यूनतम दृश्यता (Visibility Limits): मानकों के अनुसार, उड़ान भरने और लैंडिंग के लिए कम से कम 5,000 मीटर (5 किमी) की दृश्यता अनिवार्य मानी जाती है। यदि दृश्यता इससे कम हो, तो उड़ान की अनुमति नहीं होती।
- क्लाउड बेस और हवा की गति: बादलों की ऊंचाई तय सीमा से नीचे होने या तेज हवाओं के दौरान उड़ान तुरंत स्थगित करने के निर्देश होते हैं।
- पायलट-इन-कमांड का निर्णय: एविएशन नियमों के तहत, उड़ान भरने या न भरने का अंतिम निर्णय पूरी तरह पायलट के विवेक और तात्कालिक मौसम रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
प्रशासन का कड़ा रुख: सुरक्षा मानकों की उच्चस्तरीय समीक्षा
इस घटना को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों को दरकिनार करते हुए सरकार ने ठोस सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की तकनीकी या मानवीय चूक की गहराई से जांच की जा रही है।
उत्तराखंड सरकार और केंद्रीय उड्डयन प्राधिकारियों ने पर्वतीय उड़ानों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को और अधिक आधुनिक बनाने पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत उन्नत वेदर रडार सिस्टम और स्वचालित मौसम चेतावनी प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि चुनौतीपूर्ण मौसम में भी पर्वतीय कनेक्टिविटी सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे।
(Image Credit: abplive.com)






