अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन सीमा तनाव को लेकर सेना मुस्तैद है। केंद्र के मजबूत नेतृत्व में सीमाओं की सुरक्षा अभेद्य बनी हुई है।
पूर्वोत्तर के सामरिक रूप से बेहद अहम राज्य अरुणाचल प्रदेश को लेकर पड़ोसी मुल्क चीन की विस्तारवादी नीतियां समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि, भारतीय सीमा पर अब हालात पहले जैसे नहीं हैं। केंद्र सरकार की सख्त कूटनीति, सीमाओं के आधुनिकीकरण और अग्रिम चौकियों तक ऑल-वेदर कनेक्टिविटी ने सुरक्षाबलों को अभूतपूर्व ताकत दी है। वॉइस ऑफ मैनपुरी के विशेष विश्लेषण के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में सेला टनल जैसी मेगा परियोजनाओं और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ ने एलएसी पर भारत की रणनीतिक बढ़त को कई गुना मजबूत कर दिया है।
अरुणाचल और एलएसी पर कब-कब आमने-सामने आए दोनों देश?
भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा लगती है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा पर ड्रैगन हमेशा से गिद्ध दृष्टि रखने की नाकाम कोशिश करता रहा है। आइए नजर डालते हैं सीमा पर हुए बड़े टकरावों के इतिहास पर:
- 1962 का युद्ध और नामका चू: अरुणाचल प्रदेश (तब नेफा) के तवांग और नामका चू सेक्टर में चीनी सेना ने धोखे से हमला किया था, जिसके बाद सीमाओं की संवेदनशीलता को लेकर देश ने लंबी रणनीतिक सीख ली।
- 1975 का तुलुंग ला संघर्ष: अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला दर्रे पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें असम राइफल्स के चार वीर जवान शहीद हुए थे। इसके बाद दशकों तक एलएसी पर गोलीबारी नहीं हुई।
- 1986-87 का सुमदोरोंग चू गतिरोध: तवांग के पास सुमदोरोंग चू घाटी में चीनी घुसपैठ का भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन फाल्कन’ के जरिए मुंहतोड़ जवाब दिया था और सेना ने रणनीतिक चोटियों पर कब्जा कर चीन को बातचीत की मेज पर आने को मजबूर किया था।
- दिसंबर 2022 का यांग्त्से टकराव: तवांग के यांग्त्से इलाके में चीनी पीएलए सैनिकों ने भारतीय चौकी पर कब्जे की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद भारतीय सैनिकों ने तुरंत एक्शन लेते हुए उन्हें पीछे खदेड़ दिया। इस झड़प में किसी भी भारतीय जवान को गंभीर क्षति नहीं पहुंची।
सीमावर्ती सुरक्षा: चुनौतियों का सक्रियता से हो रहा समाधान
हालांकि सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों को लेकर राजनीतिक स्तर पर बयानबाजी चलती रहती है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान प्रशासन ने सीमाओं पर प्रतिक्रियात्मक रवैये को छोड़कर सक्रिय सुरक्षा नीति अपनाई है। किसी भी चुनौती को अब नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत प्रशासनिक व सैन्य स्तर पर हल किया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के तेज कदमों और सीमा सड़क संगठन (BRO) की तत्परता से अरुणाचल के अग्रिम मोर्चों तक भारी हथियारों और सैनिकों की त्वरित तैनाती अब बेहद आसान हो गई है। भारतीय कूटनीति ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमाओं पर शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य होना संभव नहीं है।
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