आस्था और भक्ति का महाकुंभ: जोरहाट में 101 देवी प्रतिमाओं का भव्य विसर्जन, जयकारों के बीच नम आंखों से विदाई

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असम के ऐतिहासिक शहर जोरहाट में मां दुर्गा की 101 प्रतिमाओं का विसर्जन पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से विदाई दी।

शारदीय नवरात्र और विजयादशमी के पावन पर्व के समापन पर जोरहाट का वातावरण पूरी तरह ‘मां दुर्गे’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप, शंखध्वनि और सिंदूर खेला के अद्भुत दृश्यों के बीच भक्तों ने मां भगवती को अगले बरस पुनः आने की प्रार्थना के साथ विदा किया। देश-दुनिया और संस्कृति से जुड़े विशेष आयोजनों की रिपोर्ट के अनुसार, जैसा कि वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों में भी रेखांकित किया जाता रहा है, भारतीय सनातन परंपरा का यह जनसैलाब सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक बन गया।

प्रशासन की मुस्तैदी: सुरक्षा के रहे कड़े और सुव्यवस्थित इंतजाम

इतने बड़े पैमाने पर आयोजित इस विसर्जन महाकुंभ को सुरक्षित और निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन ने असाधारण तत्परता दिखाई। नदी तटों और विसर्जन घाटों पर पुलिस बल, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और नागरिक सुरक्षा कर्मियों की व्यापक तैनाती रही, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

  • 101 प्रतिमाओं का क्रमबद्ध विसर्जन: किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासन ने टोकन और समय-सारणी प्रणाली लागू की थी।
  • सुरक्षा और निगरानी: पूरे विसर्जन मार्ग और प्रमुख घाटों पर ड्रोन व सीसीटीवी कैमरों से लगातार 24×7 निगरानी रखी गई।
  • त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं: आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रमुख स्थलों पर मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस की पुख्ता व्यवस्था मौजूद थी।

पर्यावरण संरक्षण और परंपरा का अनूठा समन्वय

शासन के दिशानिर्देशों के तहत इस बार विसर्जन के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया। भोगदोई नदी सहित अन्य विसर्जन स्थलों पर पूजा सामग्री को जलस्रोतों में मिलने से रोकने के लिए विशेष जाल और बैरिकेड्स लगाए गए थे। नगर निगम की टीमों ने विसर्जन के तत्काल बाद सफाई अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया कि पर्यावरण संतुलन बना रहे।

स्थानीय नागरिकों और पूजा समितियों ने भी शासन के विकासोन्मुख और पर्यावरण-हितैषी कदमों की मुक्तकंठ से सराहना की। प्रशासन की सक्रियता और जनसहयोग के चलते यह महापर्व शांति, सौहार्द और भव्यता के ऐतिहासिक संगम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

(Image Credit: abplive.com)

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