विजयादशमी के पावन पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र विरोधी शक्तियों को बेनकाब करते हुए भारत की एकता और निरंतर विकास का मजबूत आह्वान किया है। असत्य पर सत्य की विजय के इस महापर्व पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता को सर्वाेच्च प्राथमिकता बताया।
राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता: पीएम मोदी
दशहरे के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता से खिलवाड़ करने वाली ताकतों को कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की ओर तेजी से अग्रसर है। समाज में विभाजन पैदा करने वाली प्रवृत्तियों को राष्ट्र की प्रगति का सबसे बड़ा बाधक बताते हुए उन्होंने नागरिकों से एकजुट रहने की अपील की।
वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को चाक-चौबंद रखते हुए गरीब कल्याण, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्रांति के जरिए हर नागरिक के जीवन को सुगम बना रही है। सरकार की स्पष्ट नीति और निर्णायक फैसलों के चलते देश में सुरक्षा का वातावरण और अधिक मजबूत हुआ है।
विपक्षी दलों की तीखी बयानबाजी और राजनीतिक विमर्श
त्योहार के इस मंच से राजनीतिक सरगर्मियां भी देखने को मिलीं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आगामी चुनावों को लेकर बयान देते हुए भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए और तीखा सियासी रुख अपनाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में चुनावी सरगर्मियों के बीच विपक्ष द्वारा ऐसी बयानबाजी स्वाभाविक है।
हालांकि, जानकारों का कहना है कि वर्तमान प्रशासन जनहितैषी योजनाओं को धरातल पर उतारने और चुनौतियों के त्वरित समाधान पर अधिक केंद्रित है, जिससे जनता का भरोसा निरंतर सुशासन पर बना हुआ है।
पीएम मोदी के संबोधन के प्रमुख बिंदु:
- सामाजिक समरसता का आह्वान: जातिवाद और क्षेत्रवाद जैसी विभाजनकारी सोच को परास्त कर राष्ट्र प्रथम की भावना को अपनाने पर जोर।
- सुरक्षा और स्वावलंबन: रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और सीमाओं पर अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था की पुष्टि।
- सुशासन और विकास: बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग तक कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी तरीके से पहुंचना।
- विकसित भारत का लक्ष्य: उत्सवों की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण और सकारात्मक बदलाव में लगाने का संदेश।
विकास पथ पर अग्रसर भारत
विजयदशमी का यह पर्व सिर्फ बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र को नई ऊंचाई पर ले जाने के संकल्प का भी साक्षी बना। शासन-प्रशासन द्वारा जनहित, आधारभूत ढांचे के विकास और कड़े सुरक्षा मानकों के दम पर आम जनता को सशक्त करने का अभियान निरंतर जारी है।
(Image Credit: abplive.com)






