भारत-चीन रिश्तों पर ऐतिहासिक मोड़: जिनपिंग से शिखर वार्ता के बाद PM मोदी का बड़ा संदेश, सीमा पर स्थिरता को बताया पहली शर्त

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रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर राष्ट्र और दुनिया के सामने भारत का स्पष्ट रुख रखा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों की बहाली आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता पर ही टिकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच लगभग पांच वर्षों बाद हुई यह औपचारिक द्विपक्षीय बैठक कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद सफल मानी जा रही है। वॉइस ऑफ मैनपुरी के वैश्विक घटनाक्रम विश्लेषण के अनुसार, केंद्र सरकार के रणनीतिक और दृढ़ रुख के चलते वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त बहाली को लेकर जो सहमति बनी है, उसने इस संवाद की ठोस नींव तैयार की।

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर दिया कूटनीतिक संदेश

बैठक संपन्न होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत और चीन के स्थिर संबंध न केवल दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

पीएम मोदी ने द्विपक्षीय बातचीत के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया:

  • सीमा पर शांति पहली प्राथमिकता: सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
  • पारस्परिक विश्वास की नींव: द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी विश्वास (Mutual Respect, Mutual Sensitivity and Mutual Trust) पर आधारित होना चाहिए।
  • विशेष प्रतिनिधियों को निर्देश: सीमा विवाद के स्थायी समाधान और सीमा प्रबंधन के लिए दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और विशेष प्रतिनिधियों की जल्द बैठक होगी।

कूटनीतिक मजबूती और विकासोन्मुख दृष्टिकोण

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व में भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता किए बिना बातचीत की मेज पर चीन को रचनात्मक समाधान के लिए प्रेरित किया है। कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की यह सक्रियता यह दर्शाती है कि देश सीमा सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए क्षेत्रीय आर्थिक विकास और शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विपक्षी दलों की बयानबाजी के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती साख और सरकार की परिपक्व विदेश नीति का ही नतीजा है कि 2020 के गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक निर्णायक और सकारात्मक कदम उठाया गया है।

(Image Credit: abplive.com)

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