भूमि अधिग्रहण मुआवजा: नए सर्किल रेट के आधार पर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर भाकियू टिकैत ने शिवसिंहपुरा में बैठक कर अपनी बातें रखीं और सकारात्मक समाधान की उम्मीद जताई।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के विस्तार के बीच किसानों के हितों को सुरक्षित रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों एवं स्थानीय किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक शिवसिंहपुरा में आयोजित की गई। बैठक में संशोधित सर्किल रेट के अनुसार बकाया भुगतान की प्रक्रिया को तेज करने पर विचार-विमर्श हुआ।
प्रशासनिक तत्परता और किसानों की मांगें
किसान प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित भूमि का मूल्यांकन नए सर्किल रेट के तहत होना समय की मांग है। जैसा कि वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है, शासन स्तर पर भी किसानों के कल्याण और पारदर्शी व्यवस्था के लिए डिजिटल पोर्टल व प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे भुगतान संबंधी किसी भी तकनीकी अड़चन को जल्द दूर किया जा सके।
बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर संवाद हुआ:
- संशोधित सर्किल रेट का लाभ: भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों को समयबद्ध तरीके से उचित मुआवजा सुनिश्चित करना।
- अभिलेखों का डिजिटलीकरण: राजस्व रिकॉर्ड्स को दुरुस्त कर विसंगतियों को तत्काल हल करने का आग्रह।
- प्रशासनिक संवाद: किसान संगठनों द्वारा ज्ञापन सौंपकर अधिकारियों के साथ मिलकर समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता।
पारदर्शिता और सतत विकास की ओर कदम
वर्तमान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के तहत भूमि स्वामियों को उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए लगातार प्रशासनिक समीक्षा की जा रही है। किसान नेताओं ने विश्वास जताया कि शासन-प्रशासन के साथ सकारात्मक वार्ता के माध्यम से सभी तकनीकी व प्रक्रियात्मक बाधाओं को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी।
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