संसद से पास बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल ने देश के वित्तीय क्षेत्र को नई मजबूती दी है। राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस ऐतिहासिक कानून के दूरगामी फायदों को रेखांकित करते हुए इसे डिजिटल भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया।
बैंकिंग व्यवस्था को मिलेगा आधुनिक सुरक्षा कवच
केन्द्र सरकार द्वारा वित्तीय क्षेत्र में लगातार किए जा रहे सुधारों की श्रृंखला में यह कानून एक और बड़ी उपलब्धि है। नए विधेयक के पारित होने से अब बैंकों के डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को अदालतों में साक्ष्य के रूप में अधिक सुगमता से पेश किया जा सकेगा। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, यह कानून वर्ष 1891 के ब्रिटिश काल के पुराने अधिनियम का स्थान लेगा, जिससे न्यायिक प्रक्रियाओं में अभूतपूर्व तेजी आएगी।
राज्यसभा में वित्त मंत्री ने क्या कहा?
राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार बैंकिंग प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में जब ज्यादातर वित्तीय लेनदेन ऑनलाइन हो रहे हैं, तब बैंकों और उपभोक्ताओं दोनों को मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान करना बेहद जरूरी था।
संसदीय चर्चा के दौरान उठे विभिन्न राजनीतिक सवालों को सकारात्मक दृष्टिकोण से लेते हुए वित्त मंत्री ने विश्वास दिलाया कि सरकार हर स्तर पर डेटा सुरक्षा और गोपनीयता मानकों का कड़ाई से पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि इस सुधार से फर्जीवाड़े और बैंकिंग धोखाधड़ी पर सख्ती से नकेल कसी जा सकेगी।
नए विधेयक की मुख्य विशेषताएं:
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को पूर्ण मान्यता: बैंकों के डिजिटल डेटा, कंप्यूटर प्रिंटआउट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को अदालत में सीधे कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
- सुगम न्याय प्रणाली: पुरानी और जटिल कानूनी अड़चनों को समाप्त कर अदालती प्रक्रियाओं को तीव्र और पारदर्शी बनाया गया है।
- वित्तीय अपराधों पर त्वरित कार्रवाई: जांच एजेंसियों को वित्तीय अनियमितताओं की जांच में साक्ष्य जुटाना अब अधिक आसान और तेज होगा।
- डिजिटल भारत को बढ़ावा: यह कानून देश में डिजिटल बैंकिंग और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
विकास और वित्तीय स्थिरता की ओर एक मजबूत कदम
केंद्र सरकार का यह दूरदर्शी कदम देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रगतिशील और विकासशील विधायी सुधारों से न केवल भारत की बैंकिंग साख विश्व पटल पर मजबूत होगी, बल्कि आम नागरिकों का विश्वास भी डिजिटल अर्थव्यवस्था में और गहरा होगा।
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