कुलगाम आतंकी हमला: दूसरे प्रवासी मजदूर की भी मौत, नाम पूछकर मारी गोली; टीआरएफ ने ली जिम्मेदारी

⏱ 1 min read

श्रीनगर/कुलगाम। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले में घायल छत्तीसगढ़ के दूसरे प्रवासी मजदूर की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस हमले में जान गंवाने वाले मजदूरों की संख्या दो हो गई है। दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के निवासी थे और कुलगाम के केलम इलाके स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आतंकियों ने दोनों मजदूरों को गोली मारने से पहले उनके नाम पूछे थे। इस घटना की जिम्मेदारी लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) के शैडो संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है।

यह हमला एक बार फिर घाटी में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की आतंकियों की रणनीति को उजागर करता है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुट गई हैं और इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

शुक्रवार देर शाम हुआ हमला

जानकारी के अनुसार शुक्रवार देर शाम आतंकियों ने कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में स्थित ईंट भट्ठे पर काम कर रहे दो प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया। हमले में 24 वर्षीय दीपक रात्रे को गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 28 वर्षीय भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों की मदद से घायल मजदूर को सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अनंतनाग ले जाया गया। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल रेफर कर दिया। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

सीने में लगी थी गोली

अस्पताल सूत्रों के अनुसार भूपेंद्र के सीने में गोली लगी थी, जिसके कारण उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

नाम पूछकर बनाया निशाना

प्रारंभिक जांच में सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि आतंकियों ने दोनों मजदूरों को गोली मारने से पहले उनके नाम पूछे थे। जांच अधिकारी इस पहलू को गंभीरता से देख रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह हमला सुनियोजित टारगेट किलिंग का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य घाटी में काम कर रहे बाहरी लोगों के बीच भय का माहौल पैदा करना है।

टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी

इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां लश्कर-ए-ताइबा का शैडो संगठन मानती हैं। पिछले कुछ वर्षों में टीआरएफ ने घाटी में कई टारगेट किलिंग की घटनाओं की जिम्मेदारी ली है। सुरक्षा एजेंसियां संगठन के स्थानीय नेटवर्क और हमले में शामिल आतंकियों की पहचान के लिए तकनीकी एवं मानव खुफिया तंत्र का सहारा ले रही हैं।

परिजनों को दी गई सूचना

पुलिस के अनुसार मृतक दीपक रात्रे के पिता उमाशंकर रात्रे तथा भूपेंद्र के पिता दशरथ को घटना की सूचना दे दी गई है। दोनों परिवारों के सदस्य अपने रिश्तेदारों के साथ कश्मीर के लिए रवाना हो गए हैं। प्रशासन की ओर से शवों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

घाटी में 10 दिनों में दूसरी बड़ी टारगेट किलिंग

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पिछले 10 दिनों के भीतर घाटी में टारगेट किलिंग की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले भी आतंकियों ने प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों और निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमलों के पीछे आतंकियों की मंशा जम्मू-कश्मीर में सामान्य होते हालात को प्रभावित करना और लोगों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा करना है।

सुरक्षा एजेंसियों का तलाशी अभियान जारी

घटना के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। आसपास के जंगलों और संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकियों की तलाश की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय इनपुट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हमलावरों की पहचान करने में जुटी हैं।

अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को जल्द पकड़ने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही प्रवासी मजदूरों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

कुलगाम की यह घटना एक बार फिर घाटी में काम कर रहे हजारों प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। निर्माण कार्य, ईंट भट्ठों, कृषि और अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के मजदूर कार्यरत हैं। ऐसे हमलों के बाद उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकियों का उद्देश्य विकास कार्यों को प्रभावित करना और भय का वातावरण बनाना है, ताकि घाटी में सामान्य स्थिति बहाल होने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया जा सके। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे हमलों का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

Related Stories

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×

सबसे पहले खबर पाएं!

हमारे दैनिक न्यूज़लेटर की सदस्यता लें और मैनपुरी की हर ताज़ा खबर से अपडेट रहें।

Scroll to Top