मेरठ में गंगा का विकराल रूप: उफनती धारा में तिनके की तरह बहे 220 केवी हाईटेंशन लाइन के तीन विशाल टावर, अब सोरों से कानपुर तक बढ़ा बाढ़ का खतरा

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मेरठ। उत्तराखंड और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब गंगा के मैदानी क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई स्थानों पर कटान शुरू हो चुका है। मेरठ जिले के हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में शनिवार को गंगा के तेज बहाव ने ऐसी तबाही मचाई कि 220 केवी हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन के तीन विशाल टावर नदी में समा गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और यह मैदानी इलाकों में बढ़ते बाढ़ संकट का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में गंगा के किनारे बसे कई जिलों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

हस्तिनापुर के शेरपुर गांव के पास हुआ बड़ा हादसा

जानकारी के अनुसार मेरठ के हस्तिनापुर खादर क्षेत्र स्थित शेरपुर गांव के पास गंगा नदी का बहाव अचानक अत्यधिक तेज हो गया। नदी के बीचों-बीच खड़े 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन के तीन विशाल टावर लगातार हो रही कटान और तेज जलधारा का दबाव नहीं झेल सके और देखते ही देखते नदी में गिर गए।

ये ट्रांसमिशन लाइन दौराला स्थित 765 केवी ग्रिड स्टेशन से बिजनौर के नहटौर 220 केवी स्टेशन तक बिजली आपूर्ति के लिए बनाई गई थी। टावर गिरने के बाद विद्युत विभाग ने सुरक्षा के मद्देनजर लाइन को बंद कर दिया और वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से बिजली आपूर्ति बनाए रखने की कवायद शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने गंगा के विकराल रूप को लेकर चिंता जताई है। वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि नदी का तेज बहाव विशाल स्टील टावरों को अपनी चपेट में लेकर कुछ ही क्षणों में ढहा देता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और नदी तेजी से कटान कर रही थी।

क्यों गिरे इतने मजबूत हाईटेंशन टावर?

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन के टावर सामान्य परिस्थितियों में अत्यंत मजबूत संरचना होते हैं। लेकिन यदि नदी लगातार नींव के आसपास की मिट्टी काट दे तो उनकी आधार क्षमता कमजोर हो जाती है। इस घटना में भी यही हुआ।

तकनीकी कारण

  • गंगा में अचानक जलस्तर बढ़ना।
  • तेज बहाव के कारण नदी तल का कटाव (Scouring)।
  • टावर की नींव के नीचे की मिट्टी बह जाना।
  • लगातार जलदबाव से संरचना का असंतुलित होना।
  • अंततः पूरी संरचना का नदी में समा जाना।

220 केवी ट्रांसमिशन लाइन कितनी महत्वपूर्ण होती है?

220 केवी हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन बिजली उत्पादन केंद्रों से बड़े सब-स्टेशनों तक भारी मात्रा में विद्युत ऊर्जा पहुंचाने का प्रमुख माध्यम होती है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं

  • उच्च क्षमता की बिजली ट्रांसमिशन।
  • लंबी दूरी तक न्यूनतम लाइन लॉस।
  • क्षेत्रीय ग्रिड को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका।
  • औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति का आधार।

हालांकि विद्युत निगम के अनुसार वैकल्पिक ग्रिड व्यवस्था के कारण आम उपभोक्ताओं पर तत्काल बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

पहाड़ों की बारिश का असर अब मैदानी जिलों में

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा, भागीरथी, अलकनंदा और उनकी सहायक नदियों में भारी जलप्रवाह दर्ज किया जा रहा है। यही पानी अब तेजी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य गंगा के मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।

जल विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है।

सोरों घाट से कानपुर तक बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

मेरठ की यह घटना केवल स्थानीय नहीं बल्कि पूरे गंगा तटीय क्षेत्र के लिए चेतावनी मानी जा रही है। यदि ऊपरी क्षेत्रों से पानी का प्रवाह इसी तरह जारी रहा तो गंगा किनारे बसे कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है।

विशेष रूप से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में—

  • कासगंज का सोरों घाट क्षेत्र
  • फर्रूखाबाद
  • कन्नौज
  • कानपुर नगर
  • कानपुर देहात
  • उन्नाव
  • हरदोई के गंगा तटीय गांव

इन क्षेत्रों में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में पानी भरने, खेतों में कटान तथा गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीणों के लिए प्रशासन की सलाह

प्रशासन ने गंगा के तटीय गांवों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

क्या करें

  • नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचें।
  • बच्चों को गंगा के तट पर न जाने दें।
  • प्रशासनिक अलर्ट पर नजर रखें।
  • पशुओं को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ले जाएं।
  • नाव संचालन केवल प्रशासन की अनुमति से करें।
  • अफवाहों पर विश्वास न करें।

किसानों के सामने भी संकट

गंगा के बढ़ते जलस्तर से सबसे अधिक चिंता किसानों को है। नदी किनारे लगी धान, मक्का, बाजरा तथा सब्जियों की फसलें डूबने का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर खेतों का कटान भी शुरू हो चुका है।

यदि अगले 48 से 72 घंटे तक जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो हजारों बीघा कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है।

मौसम विभाग की निगरानी जारी

मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग लगातार गंगा के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ों में बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना बनी हुई है, इसलिए गंगा के मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

मेरठ सहित गंगा किनारे स्थित जिलों में प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है। सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं।

जहां-जहां कटान की आशंका अधिक है, वहां लगातार निरीक्षण किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

मेरठ के हस्तिनापुर में गंगा के तेज बहाव से 220 केवी हाईटेंशन लाइन के तीन विशाल टावरों का नदी में समा जाना केवल एक इंजीनियरिंग दुर्घटना नहीं, बल्कि गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ संकट का गंभीर संकेत है। उत्तराखंड से आ रहा भारी जलप्रवाह अब पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के मैदानी जिलों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में कासगंज के सोरों घाट से लेकर फर्रूखाबाद, कन्नौज, कानपुर, उन्नाव और हरदोई तक गंगा के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। प्रशासन की चेतावनियों का पालन और समय रहते एहतियात ही संभावित नुकसान को कम कर सकता है।

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