राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने देश की नई पीढ़ी यानी Gen-Z की सोच और उनके काम करने के तरीके पर अपने विचार साझा किए हैं। वॉइस ऑफ मैनपुरी के अनुसार, संघ प्रमुख ने युवाओं की असीम क्षमता को स्वीकारते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सही दिशा और धैर्य के साथ आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।
तकनीकी दक्षता और संस्कारों का मेल आवश्यक
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि आज की ‘Gen-Z’ पीढ़ी बेहद प्रतिभाशाली, जागरूक और तकनीक के मामले में आगे है। हालांकि, वर्तमान समय में तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य के बीच धैर्य और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब युवा ऊर्जा को सही मार्गदर्शन मिलता है, तो देश का विकास अभूतपूर्व गति प्राप्त करता है।
संघ प्रमुख के वक्तव्य के प्रमुख बिंदु:
- संस्कार और आधुनिकता का संतुलन: Gen-Z के पास वैश्विक ज्ञान का भंडार है, जिसे भारतीय मूल्यों के साथ जोड़कर देखना समय की मांग है।
- दीर्घकालिक दृष्टिकोण: त्वरित नतीजों की अपेक्षा के बजाय युवाओं को स्थायी और दूरगामी लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए।
- सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग: राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में युवाओं की सोच और सक्रियता सबसे बड़ी शक्ति है।
विकसित भारत के संकल्प से जुड़ती युवा शक्ति
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा युवाओं के सशक्तिकरण के लिए चलाए जा रहे ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ जैसे अभियानों के दौर में संघ प्रमुख का यह वक्तव्य विशेष महत्व रखता है। शासन और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं आज युवाओं को नए अवसर प्रदान करने और उनकी क्षमता का देशहित में उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सरसंघचालक मोहन भागवत के इस संबोधन को युवा पीढ़ी के लिए एक रचनात्मक मार्गदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। यह संदेश युवाओं को आधुनिक सोच के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराता है, जिससे भारत ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा सके।
(Image Credit: abplive.com)






