सिंधु जल समझौते पर भारत का कड़ा रुख: जानें सरकार ने पाकिस्तान को क्यों नहीं भेजा पानी का अलर्ट, संसद में दिया बड़ा संदेश

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सिंधु जल संधि और पाकिस्तान को पानी का अलर्ट न भेजने पर केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान रणनीतिक परिस्थितियों और पड़ोसी देश के अड़ियल रवैये के कारण पाकिस्तान को बाढ़ से जुड़ा कोई अग्रिम अलर्ट जारी नहीं किया गया।

संसद में गूंजा सिंधु जल संधि का मुद्दा

संसद में पूछे गए एक महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर देते हुए सरकार ने बताया कि सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty 1960) के तहत डेटा साझा करने की प्रक्रिया में कुछ विशेष मानदंड होते हैं। सीमा पार से जारी आतंकवाद और संधि में संशोधन के प्रस्ताव पर पाकिस्तान के नकारात्मक रुख को देखते हुए भारत ने यह कड़ा रुख अपनाया है।

भारत सरकार द्वारा स्पष्ट किए गए मुख्य बिंदु:

  • अलर्ट न भेजने का कारण: सामरिक और कूटनीतिक परिस्थितियों के तहत भारत ने डेटा साझा करने की गति को नियंत्रित किया है।
  • संधि में संशोधन की मांग: भारत ने जनवरी 2023 में ही सिंधु जल संधि के अनुच्छेद 12(3) के तहत पाकिस्तान को नोटिस जारी कर इसमें बड़े बदलावों की मांग की थी।
  • आतंकवाद पर सख्त रुख: केंद्र सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय जल वार्ता एक साथ नहीं चल सकते।

पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह कदम इस्लामाबाद पर सीधा कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए उठाया गया है। वर्ष 1960 में हुई सिंधु जल संधि के बाद से भारत ने हमेशा एक जिम्मेदार राष्ट्र की भूमिका निभाई है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रहे उल्लंघन के बाद अब नई दिल्ली ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल ली है।

(Image Credit: abplive.com)

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