स्क्रैप कारोबार में अवैध वर्चस्व कायम करने वाले माफिया ‘सुखा’ के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए उसकी 17 अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है।
देश में आर्थिक अपराधों और संगठित माफिया नेटवर्क के खात्मे के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्क्रैप सिंडिकेट से जुड़े चर्चित माफिया सुखदेव सिंह उर्फ ‘सुखा’ के वित्तीय साम्राज्य पर करारी चोट की है। जांच एजेंसी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई इस बड़ी कार्रवाई से अवैध धंधों में लिप्त अपराधियों में भारी हड़कंप मच गया है।
अवैध कमाई से खड़े किए गए सिंडिकेट पर शिकंजा
वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों को लंबे समय से स्क्रैप व्यापार की आड़ में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी, जबरन वसूली और टैक्स चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। केंद्र और राज्य सरकारों की माफिया विरोधी और पारदर्शी नीतियों के चलते प्रशासन ने बिना किसी दबाव के तुरंत सख्त कदम उठाए हैं।
ED की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी ने वर्षों तक संगठित अपराध और अनुचित तरीकों से अकूत संपत्ति अर्जित की थी। एजेंसी द्वारा कुर्क की गई 17 संपत्तियों में कई प्रमुख भूखंड, आवासीय भवन और व्यावसायिक परिसर शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
- 17 संपत्तियां अटैच: सुखा और उसके करीबियों के नाम दर्ज आवासीय व व्यावसायिक परिसरों को सील/कुर्क किया गया।
- वित्तीय स्रोतों की गहन जांच: बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और बेनामी लेन-देन के जरिए किए गए निवेश की पड़ताल जारी है।
- माफिया राज पर अंकुश: औद्योगिक और स्क्रैप सेक्टर को अनुचित दबाव व सिंडिकेट राज से मुक्त कराने की दिशा में मजबूत कदम।
पारदर्शी व्यवस्था और कानून के राज की ओर बढ़ते कदम
सरकार की स्पष्ट नीति है कि देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन द्वारा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने और व्यापारिक माहौल को पारदर्शी बनाने के इस अभियान का आम व्यापारियों और उद्यमियों ने भी स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी पूरी निष्पक्षता और दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।
(Image Credit: abplive.com)





