कश्मीर में बारिश और बर्फबारी के साथ चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत, मुगल, सिंथन और एसएसजी सड़कें बंद

चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत के साथ कश्मीर घाटी में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी, कई प्रमुख पर्वतीय सड़कें बर्फ जमने के कारण बंद।
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कश्मीर में बारिश और बर्फबारी के साथ चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत, मुगल, सिंथन और एसएसजी सड़कें बंद.

कश्मीर घाटी में कड़ाके की सर्दी के 40 दिनों के सबसे कठिन दौर चिल्ला-ए-कलां की औपचारिक शुरुआत बारिश और बर्फबारी के साथ हो गई है। इस मौसमी बदलाव के साथ ही घाटी के तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 48 घंटों में और बारिश तथा बर्फबारी की संभावना है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में मध्यम स्तर की बर्फबारी का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

चिल्ला-ए-कलां क्या है?

चिल्ला-ए-कलां कश्मीर की पारंपरिक शीत ऋतु का सबसे कठोर चरण माना जाता है, जो हर साल 21 दिसंबर से शुरू होकर 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, झीलें जमने लगती हैं और जनजीवन पर व्यापक असर पड़ता है। इसके बाद चिल्ला-ए-खुर्द और चिल्ला-ए-बच्चा का दौर आता है, लेकिन सबसे ज्यादा ठंड इसी पहले चरण में महसूस की जाती है।

बारिश और बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित

चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत के साथ घाटी के मैदानी इलाकों में लगातार बारिश हुई, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी दर्ज की गई। श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर बादल छाए रहे, जिससे ठंड और ज्यादा बढ़ गई। ठंडी हवाओं और नमी के कारण लोगों को घरों में रहने पर मजबूर होना पड़ा।

चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत के साथ कश्मीर घाटी में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी, कई प्रमुख पर्वतीय सड़कें बर्फ जमने के कारण बंद।
चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत के साथ कश्मीर घाटी में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी, कई प्रमुख पर्वतीय सड़कें बर्फ जमने के कारण बंद।

प्रमुख सड़कें बर्फबारी से बंद

लगातार बर्फ गिरने के कारण कश्मीर को अन्य क्षेत्रों से जोड़ने वाली कई अहम सड़कें बंद कर दी गई हैं।

  • मुगल रोड पर भारी बर्फ जमने से यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है।
  • सिंथन टॉप पर भी बर्फबारी के चलते वाहनों की आवाजाही बंद है।
  • एसएसजी रोड (श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी मार्ग) पर फिसलन और बर्फ जमने के कारण सुरक्षा के लिहाज से ट्रैफिक रोक दिया गया है।

प्रशासन ने यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अगले 48 घंटों तक घाटी में रुक-रुक कर बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। ऊंचाई वाले इलाकों—गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों—में मध्यम बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही तापमान में और गिरावट आ सकती है, जिससे ठंड का प्रकोप बढ़ेगा।

बिजली-पानी और हीटिंग पर असर

चिल्ला-ए-कलां के दौरान बिजली और पानी की आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। बर्फ जमने से जलापूर्ति पाइपलाइन प्रभावित होती हैं और बिजली लाइनों को भी नुकसान पहुंचता है। कई इलाकों में लोगों ने पारंपरिक कांगड़ी और हीटर का सहारा लेना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने बिजली विभाग और जलापूर्ति एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा है।

प्रशासन की तैयारियां

राज्य प्रशासन ने चिल्ला-ए-कलां को देखते हुए आवश्यक सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। बर्फ हटाने वाली मशीनें (स्नो क्लीयरेंस मशीन) संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दी गई हैं। अस्पतालों, फायर सर्विस और आपातकालीन सेवाओं को 24 घंटे तैयार रहने को कहा गया है।

किसानों और बागवानों पर असर

बर्फबारी से जहां एक ओर सेब और अन्य फसलों के लिए प्राकृतिक नमी का फायदा होता है, वहीं अधिक बर्फबारी से बागों को नुकसान की आशंका भी रहती है। बागवानों ने प्रशासन से अपील की है कि सड़कों की जल्द बहाली की जाए ताकि सेब भंडारण और परिवहन में दिक्कत न हो।

पर्यटकों के लिए सलाह

पर्यटन विभाग ने कश्मीर आने वाले सैलानियों को मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है। ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों पर जाने से पहले स्थानीय प्रशासन से जानकारी लेने को कहा गया है। बर्फबारी के कारण कई रिसॉर्ट्स और होटलों में बुकिंग प्रभावित हुई है, हालांकि बर्फ देखने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह मौसम आकर्षण का केंद्र भी बन रहा है।

कुल मिलाकर

बारिश और बर्फबारी के साथ शुरू हुआ चिल्ला-ए-कलां कश्मीर में सर्दी के सबसे कठिन दौर का संकेत दे रहा है। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन और मौसम विभाग की सतर्कता के बीच आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे सावधानी बरतें, अनावश्यक यात्रा से बचें और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

 

 

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