एसआईआर परियोजना पर गरमाई सियासत: राकेश टिकैत के महामार्च के बीच संवाद से समाधान निकालने में जुटा प्रशासन

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विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) को लेकर किसान संगठनों के प्रस्तावित बड़े मार्च के बीच प्रशासन विकास और कृषकों के हितों के समन्वय हेतु पूरी तरह सक्रिय है।

विकास की नई राह और किसानों के साथ संवाद का प्रयास

राज्य के समग्र औद्योगिक और आर्थिक उत्थान के लिए परिकल्पित विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) परियोजना को लेकर कुछ क्षेत्रों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। किसान संगठनों ने इस योजना के विरोध में एक बड़े मार्च की रूपरेखा तैयार की है। हालांकि, शासन-प्रशासन का स्पष्ट मत है कि यह परियोजना स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं को रोजगार और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारी लगातार किसानों के संपर्क में हैं ताकि भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़ी किसी भी भ्रांति का शांतिपूर्ण व पारदर्शी समाधान निकाला जा सके।

मार्च को लेकर किसान नेताओं की रणनीति

प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके सहित कई किसान नेता आंदोलन को गति देने के लिए पहुंच रहे हैं। किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि वे इस मार्च के जरिए अपनी मांगों को सार्वजनिक पटल पर रखेंगे।

आंदोलन को लेकर सामने आ रहे प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • राकेश टिकैत एवं अभिजीत दीपके की अगुवाई में किसानों के प्रतिनिधिमंडल का जमावड़ा।
  • किसानों द्वारा भूमि अधिग्रहण दरों की समीक्षा और उचित मुआवजे की औपचारिक मांग।
  • स्थानीय आबादी के लिए परियोजना में प्रत्यक्ष रोजगार और सुरक्षा की मांग।
  • प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम।

प्रशासन का रुख: विकास भी और किसान कल्याण भी

सरकार और स्थानीय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि प्रदेश की प्रगति में अन्नदाताओं का योगदान सर्वोपरि है। अधिकारियों के मुताबिक, औद्योगिक गलियारों के निर्माण से न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को पंख लगेंगे, बल्कि स्थानीय किसानों की जमीनों का मूल्य भी कई गुना बढ़ेगा। विपक्ष और कुछ संगठनों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को प्रशासन ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए सकारात्मक संवाद की मेज पर आने का आह्वान किया है, जिससे विकास की गति बाधित न हो और किसानों के अधिकारों का भी पूरा संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

(Image Credit: abplive.com)

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