मैनपुरी पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग का अश्लील वीडियो बनाकर दुष्कर्म करने के गंभीर मामले में त्वरित न्याय करते हुए दोषी को 20 साल के कठोर कारावास और 1.02 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सख्त पैरवी से पीड़िता को मिला न्याय
उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चल रहे विशेष अभियानों के बीच स्थानीय अदालत ने एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष की मजबूत और प्रभावी पैरवी के चलते पॉक्सो कोर्ट (विशेष न्यायाधीश) ने आरोपी को सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी करार दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मासूम बच्चियों के साथ विश्वासघात और ब्लैकमेलिंग जैसे जघन्य कृत्य करने वाले समाज के लिए खतरा हैं और उन्हें किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
मामले के अनुसार, दोषी युवक ने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर पहले उसका अश्लील वीडियो तैयार किया था। इसके बाद वह उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता के साथ लगातार दुष्कर्म और मानसिक प्रताड़ना कर रहा था। पीड़िता के परिजनों द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल विधिक कार्रवाई शुरू की।
अदालत के फैसले के प्रमुख बिंदु:
- 20 वर्ष का सश्रम कारावास: दोषी को पॉक्सो अधिनियम और संबंधित धाराओं के तहत 20 साल की कठोर जेल की सजा।
- 1.02 लाख रुपये का जुर्माना: अदालत ने दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया, जिसमें से एक निश्चित हिस्सा पीड़िता के पुनर्वास के लिए दिया जाएगा।
- सटीक डिजिटल साक्ष्य: पुलिस द्वारा वैज्ञानिक साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट समयबद्ध तरीके से अदालत में प्रस्तुत किए गए।
प्रशासन की तत्परता और जीरो टॉलरेंस नीति का असर
प्रदेश सरकार द्वारा महिला सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ और त्वरित न्याय दिलाने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता का सकारात्मक परिणाम इस फैसले में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। पुलिस और अभियोजन विभाग की सक्रियता से ऐसे संवेदनशील मामलों में अपराधियों को तेजी से कानून के कटघरे में खड़ा कर सजा दिलाई जा रही है, जिससे आम जनता में न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
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