मैनपुरी डीएम की औचक जूम बैठक से खुली ढिलाई, 18 लापरवाही अधिकारियों का वेतन रोककर दिया सुशासन का संदेश

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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के लिए **मैनपुरी DM** ने एक डिजिटल समीक्षा बैठक बुलाई। इसमें अनुपस्थित और गैर-जिम्मेदार पाए गए 18 अफसरों पर कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोक दिया गया है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, राज्य सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यह कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है।

डिजिटल निगरानी से प्रशासनिक जवाबदेही तय

उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार राज्य में सरकारी योजनाओं के शत-प्रतिशत कार्यान्वयन और त्वरित जनसुनवाई को प्राथमिकता दे रही है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने जिले के विकास कार्यों और विभागीय प्रगति का जायजा लेने के लिए अचानक एक महत्वपूर्ण जूम (Zoom) वर्चुअल मीटिंग आयोजित की थी। इस बैठक का उद्देश्य जमीनी स्तर पर चल रही कल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति को आंकना था।

बैठक के दौरान जब जिला प्रशासन ने अधिकारियों की उपस्थिति और उनके विभागों की प्रगति रिपोर्ट खंगाली, तो कई अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित मिले या कार्य में लापरवाही बरतते पाए गए। सुशासन की भावना को मजबूत करते हुए डीएम ने तुरंत संज्ञान लिया और 18 अधिकारियों का वेतन तत्काल रोकने का आदेश जारी कर दिया।

प्रशासनिक सुधार के लिए उठाए गए प्रमुख कदम

जिला प्रशासन द्वारा पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से निम्नलिखित सख्त निर्देश जारी किए गए हैं:

  • वेतन आहरण पर रोक: बैठक से गायब और लापरवाह पाए गए 18 विभागीय अधिकारियों के चालू माह के वेतन रोकने के आदेश जारी।
  • कारण बताओ नोटिस: सभी संबंधित अफसरों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
  • डिजिटल ट्रैकिंग: विकास परियोजनाओं में देरी रोकने के लिए भविष्य में भी ऐसी अचानक वर्चुअल और धरातलीय समीक्षाएं जारी रहेंगी।
  • जनसमस्याओं का समयबद्ध निस्तारण: जिले के प्रत्येक नागरिक की समस्या का तय समयसीमा के भीतर समाधान करने का निर्देश।

सुशासन और जन-विकास को मिल रही मजबूती

राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है कि जनता के कार्यों में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैनपुरी जिला प्रशासन का यह कदम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर किस प्रकार सरकारी तंत्र को अधिक सतर्क और सक्रिय बनाया जा सकता है। इस तरह के औचक निरीक्षणों और डिजिटल मॉनिटरिंग से न केवल सरकारी योजनाओं की गति तेज होगी, बल्कि आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।

(Image Credit: news.google.com)

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