नीलगिरी के मुन्नार में पाले की मार, चाय के बागानों में भारी नुकसान, उत्पादन पर तीन महीने तक असर की आशंका

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नीलगिरी के मुन्नार में पाले की मार, चाय के बागानों में भारी नुकसान, उत्पादन पर तीन महीने तक असर की आशंका

मुन्नार (केरल):
नीलगिरी की पहाड़ियों में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन और चाय उत्पादक क्षेत्र मुन्नार इन दिनों कड़ाके की ठंड और पाले की चपेट में है। अचानक गिरे तापमान ने यहां के चाय बागानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती आकलन के अनुसार, मुन्नार क्षेत्र में अकेले करीब 100 हेक्टेयर चाय की फसल पाले से प्रभावित हुई है, जिससे आने वाले तीन महीनों तक उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

बीते कुछ दिनों से मुन्नार और आसपास के इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया। पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय तापमान शून्य के करीब पहुंचने से चाय की नाजुक पत्तियों पर पाले की परत जम गई। इसके कारण पत्तियां झुलस गईं और कई स्थानों पर पौधों की ऊपरी नई कोपलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। चाय उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पाले का सबसे ज्यादा असर नई पत्तियों पर पड़ता है, जो चाय उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती हैं।

मुन्नार के चाय बागानों में पाले की मार के बाद झुलसी हुई पत्तियां, तापमान में गिरावट से करीब 100 हेक्टेयर फसल को नुकसान।

स्थानीय बागान मालिकों और श्रमिकों के अनुसार, सुबह के समय बागानों में पत्तियों पर सफेद परत दिखाई दी, जो पाले का स्पष्ट संकेत थी। दिन चढ़ने के साथ ही जब धूप निकली, तो पत्तियां मुरझाई हुई नजर आईं। इससे साफ हो गया कि फसल को नुकसान पहुंच चुका है। कई बागानों में उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है।

चाय बोर्ड और स्थानीय कृषि अधिकारियों ने भी नुकसान की पुष्टि की है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित पौधों को दोबारा सामान्य स्थिति में आने में समय लगेगा। चाय की फसल को फिर से पत्तियां देने में कम से कम दो से तीन महीने का समय लग सकता है। इसका सीधा असर उत्पादन और आपूर्ति पर पड़ेगा, जिससे बाजार में चाय की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

मुन्नार की अर्थव्यवस्था में चाय उद्योग की अहम भूमिका है। यहां हजारों परिवार चाय बागानों पर निर्भर हैं। पाले से हुए नुकसान के कारण न केवल बागान मालिकों को आर्थिक झटका लगा है, बल्कि दिहाड़ी पर काम करने वाले श्रमिकों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है। कई बागानों में काम के घंटे कम कर दिए गए हैं, जिससे मजदूरों की आय घट सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के चलते इस तरह की चरम मौसम घटनाएं अब अधिक बार देखने को मिल रही हैं। पहले जहां मुन्नार में हल्की ठंड सामान्य मानी जाती थी, वहीं अब अचानक तापमान में तेज गिरावट और पाले की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह चाय जैसी संवेदनशील फसलों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

बागान प्रबंधन पाले से बचाव के लिए कुछ उपायों पर भी विचार कर रहा है। इनमें पौधों की कटाई-छंटाई में बदलाव, जैविक स्प्रे का इस्तेमाल और ठंड के दौरान सिंचाई तकनीकों में सुधार शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक पाले से पूरी तरह बचाव कर पाना मुश्किल है।

स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित बागानों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। नुकसान के अंतिम आंकड़े सामने आने के बाद राहत और सहायता को लेकर निर्णय लिया जा सकता है। बागान मालिक सरकार से फसल बीमा और आर्थिक सहायता की मांग भी कर रहे हैं, ताकि हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।

कुल मिलाकर, मुन्नार के चाय बागानों में पाले की मार ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि मौसम में हो रहे बदलाव किस तरह कृषि और बागवानी क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि चाय उत्पादन की बहाली इसी पर निर्भर करेगी।

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