रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी में 40% हिस्सेदारी के साथ जी-7 से आगे निकल चुके हैं, जिसमें भारत का आर्थिक योगदान बेहद निर्णायक रहा है।
जी-7 देशों के दबदबे को ब्रिक्स की दो टूक चुनौती
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के शक्तिशाली समूह जी-7 पर तंज कसते हुए कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र अब बदल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स समूह (BRICS) की ताकत लगातार बढ़ रही है और क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर ब्रिक्स देशों की कुल अर्थव्यवस्था जी-7 देशों से काफी आगे निकल चुकी है। पुतिन के अनुसार, वर्तमान में ब्रिक्स वैश्विक जीडीपी के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो पश्चिमी प्रभुत्व के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।
वॉइस ऑफ मैनपुरी के अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज ब्रिक्स मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरा है। केंद्र सरकार की नीतियों, तेज गति से हो रहे ढांचागत सुधारों और स्थिर आर्थिक वृद्धि ने ब्रिक्स को दुनिया का सबसे भरोसेमंद आर्थिक इंजन बना दिया है।
आंकड़ों में समझें ब्रिक्स बनाम जी-7 की ताकत
रूसी राष्ट्रपति ने वैश्विक व्यापार और आर्थिक विकास पर चर्चा करते हुए तुलनात्मक आंकड़े सामने रखे:
- जीडीपी में ऐतिहासिक हिस्सेदारी: 1992 में जी-7 की हिस्सेदारी 45.5% थी, जो घटकर 30% के आसपास आ गई है, जबकि ब्रिक्स का हिस्सा बढ़कर 40% के पार पहुंच चुका है।
- तेजी से बढ़ती आबादी और बाजार: दुनिया की 45 फीसदी से अधिक आबादी ब्रिक्स देशों में रहती है, जहां भारत सबसे बड़ा उपभोक्ता और विनिर्माण केंद्र बनकर उभर रहा है।
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार: डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार को राष्ट्रीय मुद्राओं में बढ़ावा देने की ठोस रूपरेखा तैयार की जा रही है।
वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक भूमिका
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपने संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति रुख से दुनिया भर में विश्वसनीयता हासिल की है। जहां एक ओर पश्चिमी देश मंदी और महंगाई की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने देश को 8 प्रतिशत के करीब विकास दर के साथ वैश्विक आर्थिक विकास का नेतृत्व करने का अवसर प्रदान किया है।
राष्ट्रपति पुतिन का यह बयान न केवल वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World) की आवश्यकता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि आने वाले समय में विश्व अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में भारत की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होगी।
(Image Credit: abplive.com)



