‘लद्दाख की आवाज दबाकर धर्मेंद्र प्रधान को तवज्जो क्यों?’ सोनम वांगचुक के अनशन पर पत्रकार अभिजीत दीपके ने PM मोदी से दागे तीखे सवाल

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लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाजें तेज हो गई हैं। वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों के अनुसार, इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी के बीच पत्रकार अभिजीत दीपके ने PM नरेंद्र मोदी से तीखे सवाल पूछे हैं, जिसमें उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्राथमिकताओं पर गंभीर निशान साधा है।

‘धर्मेंद्र प्रधान इतने अहम क्यों?’ — अभिजीत दीपके का बड़ा हमला

सोनम वांगचुक लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और भूमि अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली के लद्दाख भवन में लगातार अनशन कर रहे हैं। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए सवाल किया कि आखिर सरकार लद्दाख के संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को हल करने के बजाय कुछ चुनिंदा राजनीतिक प्राथमिकताओं में ही क्यों उलझी हुई है?

अभिजीत दीपके ने अपने सवाल के जरिए केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को कटघरे में खड़ा किया है। उनका मानना है कि लद्दाख की जनता और सोनम वांगचुक की मांगों को नजरअंदाज करना देश की सीमाओं और पर्यावरण सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

विवाद से जुड़े 4 प्रमुख बिंदु:

  • लद्दाख की मांग: लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करना और पूर्ण राज्य का दर्जा देना।
  • सोनम वांगचुक का सत्याग्रह: शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे वांगचुक और उनके समर्थकों के प्रति पुलिस और प्रशासन का कड़ा रुख।
  • धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका पर सवाल: अभिजीत दीपके ने पूछा कि क्या राजनीतिक रणनीति और कुछ चुनिंदा मंत्रियों का प्रभाव जनता की आवाज़ से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है?
  • केंद्र की चुप्पी पर घमासान: गंभीर विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद गृह मंत्रालय की ओर से ठोस और सकारात्मक बातचीत की कमी।

लद्दाख आंदोलन और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल

सोनम वांगचुक का अनशन अब केवल लद्दाख की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है। देश के विभिन्न विपक्षी दलों, नागरिक अधिकार संगठनों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि सरकार को हठधर्मिता छोड़कर सोनम वांगचुक और लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठकर बातचीत करनी चाहिए, ताकि अनशन समाप्त कराया जा सके और लद्दाख के लोगों को उनका हक मिल सके।

(Image Credit: abplive.com)

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