महाराष्ट्र के सियासी संग्राम में उद्धव ठाकरे को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने शिंदे गुट में 6 सांसदों के विलय पर तुरंत रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।
अदालत में क्या हुआ? जानिए पूरा मामला
महाराष्ट्र राजनीति की लड़ाई एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे तक पहुंच चुकी है। उद्धव ठाकरे गुट ने याचिका दायर कर मांग की थी कि शिवसेना के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने और विलय की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने इस मांग को खारिज करते हुए फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया। जैसा कि वॉइस ऑफ मैनपुरी की ताज़ा खबरों में लगातार इस सियासी हलचल को कवर किया जा रहा है, यह फैसला उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 बड़ी बातें:
- रोक लगाने से इनकार: सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों के विलय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी है।
- विपक्ष को नोटिस जारी: अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एकनाथ शिंदे गुट और संबंधित 6 सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है।
- संवैधानिक पहलू पर विचार: सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की जांच करेगा कि दलबदल विरोधी कानून के तहत यह कदम कितना जायज था।
उद्धव गुट के लिए कितना बड़ा झटका?
लोकसभा और विधानसभा में अपना अधिकार खो चुके उद्धव ठाकरे के लिए यह कानूनी लड़ाई बेहद अहम थी। अगर सुप्रीम कोर्ट अंतरिम रोक लगा देता, तो शिंदे गुट पर नैतिक और कानूनी दबाव बनता। लेकिन कोर्ट के इस रुख से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे को बड़ी राहत मिली है और संसद में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी। हालांकि, जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक 6 सांसदों का शिंदे गुट में विलय प्रभावी बना रहेगा।
(Image Credit: abplive.com)






