उत्तर प्रदेश, न्यायिक फेरबदल: 266 ADJ ट्रांसफर, 13 जज दंपतियों को एक ही जिले में पोस्टिंग

प्रयागराज/लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य की न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 266 एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज (ADJ) सहित कुल 711 न्यायिक अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। यह आदेश न्यायिक प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ अधिकारियों के पारिवारिक जीवन को संतुलित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट के महानिबंधक मनजीत सिंह श्योराण द्वारा जारी इस आदेश में सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 15 अप्रैल 2026 तक अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें।

जज दंपतियों को एक साथ पोस्टिंग: बड़ा मानवीय कदम

इस ट्रांसफर सूची की सबसे खास बात यह रही कि करीब 13 न्यायिक दंपतियों को एक ही जिले में पोस्टिंग दी गई है। यह निर्णय लंबे समय से उठती मांगों के अनुरूप माना जा रहा है, क्योंकि पहले कई जज पति-पत्नी अलग-अलग जिलों में तैनात रहते थे, जिससे पारिवारिक जीवन प्रभावित होता था।

प्रमुख जज दंपति जिनकी एक जिले में तैनाती हुई:

  • संतोष कुमार यादव – संदीपा यादव (बरेली)
  • विकास नागर – प्रतीक्षा नागर (गोरखपुर)
  • गौरव शर्मा – नीतू पाठक (वाराणसी)
  • निशांत यादव – अर्चना यादव (शाहजहांपुर)
  • सीताराम – अलका भारती (रामपुर)
  • अभय प्रताप सिंह – अनुराधा पुंडीर (प्रयागराज)

इस कदम को न्यायिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

व्यापक स्तर पर ट्रांसफर: 711 अधिकारियों में बदलाव

इस प्रशासनिक निर्णय में केवल ADJ ही नहीं, बल्कि अन्य न्यायिक अधिकारियों को भी शामिल किया गया है:

  • 266 एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज
  • 169 सिविल जज (सीनियर डिवीजन)
  • 276 सिविल जज (जूनियर डिवीजन)

यानी कुल 711 न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है।

इन तबादलों का प्रभाव राज्य के लगभग सभी प्रमुख जिलों—आगरा, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, गाजियाबाद, वाराणसी और कानपुर—पर देखने को मिलेगा।

महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियुक्तियां

हाईकोर्ट ने कई अधिकारियों को विशेष प्रशासनिक और न्यायिक पदों पर भी नियुक्त किया है:

  • नीतीश कुमार राय को विशेष सचिव एवं अपर एल.आर., न्याय विभाग, लखनऊ
  • धीरेंद्र कुमार-द्वितीय को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में रजिस्ट्रार (न्यायिक)
  • वरुण मोहित निगम और ज्ञान प्रकाश तिवारी द्वितीय को हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (न्यायिक)
  • अपर्णा त्रिपाठी और निशा झा को ज्यूडिशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (JTRI), लखनऊ में एडिशनल डायरेक्टर

इन नियुक्तियों से न्यायिक प्रशासन की कार्यक्षमता और प्रशिक्षण प्रणाली को और मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

प्रशासनिक संतुलन और पारदर्शिता पर जोर

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 3 अप्रैल 2026 तक प्राप्त सभी अभ्यावेदनों (representation) का निस्तारण कर लिया गया है और उनके आधार पर अंतिम ट्रांसफर सूची तैयार की गई है।

इसके अलावा, अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि:

  • जो अधिकारी स्वयं के अनुरोध पर समय से पहले ट्रांसफर कराए गए हैं, उन्हें TA/DA (यात्रा व दैनिक भत्ता) का लाभ नहीं मिलेगा।

यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

न्यायिक प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बड़े पैमाने पर ट्रांसफर से कई स्तरों पर सुधार देखने को मिल सकता है:

1. लंबित मामलों के निपटारे में तेजी

नए स्थानों पर नियुक्ति से कार्य का पुनर्वितरण होगा, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आ सकती है।

2. प्रशासनिक दक्षता में सुधार

न्यायिक अधिकारियों को उनके अनुभव और आवश्यकता के अनुसार स्थानांतरित करने से कोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

3. पारिवारिक संतुलन

जज दंपतियों को एक ही जिले में पोस्टिंग देने से मानसिक तनाव कम होगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके कार्य पर भी पड़ेगा।

जिलों में बड़े स्तर पर असर

इस निर्णय का असर राज्य के लगभग हर हिस्से में पड़ेगा। विशेष रूप से:

  • प्रयागराज
  • गोरखपुर
  • वाराणसी
  • कानपुर
  • मेरठ

इन जिलों में न्यायिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न्यायिक प्रशासन में मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। लंबे समय से जज दंपतियों को एक साथ पोस्टिंग देने की मांग उठती रही है, जिसे अब अमल में लाया गया है।

साथ ही, बड़े पैमाने पर ट्रांसफर से यह संकेत भी मिलता है कि हाईकोर्ट न्यायिक व्यवस्था को अधिक गतिशील और परिणामोन्मुख बनाना चाहता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि न्यायिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों के जीवन और कार्य दोनों को संतुलित करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

जहां एक ओर इससे न्यायिक प्रणाली में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर जज दंपतियों को एक साथ रहने का अवसर मिलना उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए भी सकारात्मक साबित होगा।

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