गोरखपुर गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा’: 2026 गौरक्षा के संकल्प के साथ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा अभियान

⏱ 1 min read

गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा: 2026 गौरक्षा के संकल्प

वाराणसी: सनातन धर्म और गौरक्षा के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक व्यापक जनजागरण अभियान की घोषणा की है। इस अभियान का नाम ‘गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा’ रखा गया है, जो 03 मई से गोरखपुर से शुरू होकर पूरे उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को कवर करेगी। यह यात्रा न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या है ‘गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा’?

‘गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य गौमाता की रक्षा, संवर्धन और उनके सम्मान को लेकर समाज में जागरूकता फैलाना है। शंकराचार्य के अनुसार, यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक और वैचारिक आंदोलन है, जो सनातन समाज को संगठित करने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गौमाता को केवल एक पशु नहीं, बल्कि “धर्म, संस्कृति और सृष्टि की पोषक शक्ति” के रूप में देखा जाता है। इस यात्रा के माध्यम से वे जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक भावना नहीं बल्कि आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ा विषय है।

यात्रा का रूट और कार्यक्रम                                                  यह यात्रा 03 मई को गोरखपुर से शुरू होगी और लगभग 81 दिनों तक चलेगी। इस दौरान यह यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी।

  • प्रतिदिन लगभग 5 विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद
  • 81 दिनों में संपूर्ण प्रदेश का कवरेज
  • समापन पुनः गोरखपुर में
  • इसके बाद लखनऊ के लिए प्रस्थान

लखनऊ में इस यात्रा का अंतिम चरण आयोजित होगा, जहां एक बड़े स्तर पर शक्ति प्रदर्शन और संकल्प सभा की योजना बनाई गई है।

अक्षौहिणी सेना का गठन

इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसके साथ ही ‘अक्षौहिणी सेना’ का गठन किया जाएगा। शंकराचार्य ने बताया कि यह सेना गौरक्षा और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित होगी।

24 जुलाई को लखनऊ में यह अक्षौहिणी सेना एक साथ उपस्थित होगी और वहां से आगे के आंदोलन की दिशा तय की जाएगी। यह पहल धार्मिक आंदोलन को संगठित शक्ति में बदलने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है।

सरकार पर तीखा हमला

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में केंद्र और राज्य सरकारों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि:

  • गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने में क्या बाधा है?
  • क्या देश की अर्थव्यवस्था गौमांस व्यापार पर निर्भर है?
  • बहुमत की मांग के बावजूद सरकार निर्णय क्यों नहीं ले रही?

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब हर निर्णय बहुमत से होता है, तो गौ संरक्षण के मामले में बहुमत की अनदेखी क्यों की जा रही है।

‘हिंदुओं के वोट लेकर छल’ का आरोप

शंकराचार्य ने सरकारों पर आरोप लगाया कि वे हिंदू समाज के वोट लेकर उनके मूल मुद्दों की अनदेखी कर रही हैं। उन्होंने कहा:

“स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद भी सनातन समाज की आवाज को अनसुना किया जा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि “सनातनी राजनीति” की शुरुआत हो, जिससे समाज अपने मूल्यों और आस्था की रक्षा कर सके।

पाकिस्तान का उदाहरण देकर उठाए सवाल

अपने बयान में शंकराचार्य ने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां भी गौ रक्षा के लिए उतना प्रयास होता जितना भारत में हुआ है, तो संभवतः वहां भी गौमाता को संरक्षण मिल जाता।

यह बयान राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन गया है।

प्रमुख मांगें क्या हैं?

इस यात्रा के माध्यम से शंकराचार्य ने सरकार के सामने कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  1. गौमाता को राष्ट्रमाता और राज्य माता घोषित किया जाए
  2. गौमाता को पशु सूची से हटाया जाए
  3. गौमांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
  4. गौसंरक्षण के लिए सख्त कानून बनाए जाएं

उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति पर प्रभाव डाल सकती है। 403 विधानसभा सीटों तक पहुंचने वाली यह यात्रा सीधे तौर पर जनमत को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।

यह अभियान:

  • ग्रामीण और धार्मिक मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है
  • गौरक्षा को एक बार फिर प्रमुख चुनावी मुद्दा बना सकता है
  • सनातन संगठनों को एक मंच पर ला सकता है

‘गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा’ केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक अभियान के रूप में उभर रही है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का यह प्रयास गौरक्षा के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर फिर से केंद्र में ला सकता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस यात्रा का जनसमर्थन कितना मिलता है और सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

Related Stories

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×

सबसे पहले खबर पाएं!

हमारे दैनिक न्यूज़लेटर की सदस्यता लें और मैनपुरी की हर ताज़ा खबर से अपडेट रहें।

Scroll to Top