नई दिल्ली / वॉशिंगटन, 9 जनवरी 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक के एक बयान ने इस डील के रुकने की असली वजह पर से पर्दा उठा दिया है।
लटनिक ने दावा किया कि अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अपेक्षित फोन कॉल नहीं हो सका, जिससे यह समझौता आगे नहीं बढ़ पाया।
उनके अनुसार, यह कॉल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राजनीतिक भरोसे और प्राथमिकता का संकेत था।

“डील तैयार थी, लेकिन कॉल नहीं हुई”
अमेरिकी मंत्री ने कहा,
“हम लगभग हर बिंदु पर सहमत थे। लेकिन वह एक कॉल, जो अंतिम मुहर लगाती, कभी नहीं आई।”
इस बयान के बाद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
भारत को क्या नुकसान हुआ?
व्यापार समझौता न होने से अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिए। इसका असर सीधे:
टेक्सटाइल उद्योग
स्टील सेक्टर
फार्मा कंपनियों
आईटी निर्यात
पर पड़ा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह डील भारत को अरबों डॉलर का व्यापार लाभ दिला सकती थी।
सरकार ने बयान को क्यों बताया भ्रामक?
भारत सरकार ने अमेरिकी मंत्री के दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि मोदी और ट्रंप के बीच पहले भी कई बार रणनीतिक बातचीत हो चुकी है।
सरकार का कहना है कि व्यापार वार्ता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और भविष्य में नए प्रयास संभव हैं।
कूटनीति का बड़ा सबक
यह मामला बताता है कि वैश्विक व्यापार समझौतों में आर्थिक आंकड़ों से ज्यादा राजनीतिक संवाद की भूमिका निर्णायक होती है।
भारत और अमेरिका दोनों के लिए यह संबंध सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह डील भविष्य में फिर से बातचीत की मेज पर आ सकती है। बदलती वैश्विक राजनीति और आर्थिक जरूरतें दोनों देशों को फिर करीब ला सकती हैं।



