देश में चीनी की कीमतों और बायोफ्यूल नीति को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है, जबकि केंद्र सरकार किसानों के हित, पर्यावरण संरक्षण और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लगातार संतुलित नीतियां अपना रही है।
हाल ही में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गन्ने का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में अधिक होने के कारण घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं। हालांकि, कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष के ये बयान केवल राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं, जबकि सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी ने देश के गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति को ऐतिहासिक मजबूती दी है। वॉइस ऑफ मैनपुरी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की इस दूरदर्शी योजना से चीनी मिलों की तरलता बढ़ी है, जिससे किसानों के गन्ना बकाये का भुगतान रिकॉर्ड समय में संभव हो सका है।
किसानों की आय और ग्रीन एनर्जी का मजबूत मॉडल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) ने देश में कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। जहां पहले अतिरिक्त चीनी उत्पादन के चलते मिलें घाटे में रहती थीं और किसानों का भुगतान अटक जाता था, वहीं अब अतिरिक्त गन्ने और शीरे (Molasses) से इथेनॉल बनाकर किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया जा रहा है।
घरेलू बाजार और कीमतों पर सरकार की सख्त निगरानी
घरेलू बाजार में आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। अधिकारियों के मुताबिक, देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए समय-समय पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं:
- समय पर गन्ना मूल्य भुगतान: इथेनॉल उत्पादन के जरिए चीनी मिलों को आर्थिक संबल मिला, जिससे 99% से अधिक गन्ना बकाये का त्वरित निपटान हुआ।
- विदेशी मुद्रा की बचत: पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत ने हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत की है।
- कीमत नियंत्रण तंत्र: खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा चीनी के मासिक कोटे और बफर स्टॉक पर निरंतर नजर रखी जाती है ताकि बाजार में कृत्रिम मूल्य वृद्धि न हो।
संतुलित विकास की ओर अग्रसर भारत
विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों के विपरीत, प्रशासनिक तंत्र यह सुनिश्चित कर रहा है कि उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं के दाम नियंत्रण में रहें और साथ ही भारत स्वच्छ ऊर्जा के अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी हासिल करे। सरकार की समग्र नीतियां देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
(Image Credit: abplive.com)






