लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पिछले 26 दिनों से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद उन्होंने यह कदम उठाया।
दिल्ली के लद्दाख भवन में समर्थकों की मौजूदगी में जूस पीकर अनशन तोड़ने के बाद सोनम वांगचुक ने एक वीडियो जारी किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “26 दिनों के लंबे अंतराल के बाद आज भोजन का स्वाद बेहद अद्भुत और अच्छा लग रहा है।” वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के मुताबिक, वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यह अनशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि सरकार के वादे के बाद इसे केवल स्थगित किया गया है।
किन शर्तों पर सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन?
गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने अनशन स्थल पर पहुंचकर लद्दाख के प्रतिनिधियों से बातचीत की और लिखित रूप से मुख्य मांगों पर चर्चा के लिए आधिकारिक तारीख तय की। सोनम वांगचुक ने निम्नलिखित शर्तों और आश्वासनों के आधार पर अपनी भूख हड़ताल वापस ली:
- 3 दिसंबर 2024 को आधिकारिक बैठक: गृह मंत्रालय ने लद्दाख के प्रतिनिधियों (Apex Body Leeh and Kargil Democratic Alliance) के साथ उच्च स्तरीय वार्ता के लिए 3 दिसंबर की तारीख तय की है।
- छठी अनुसूची पर चर्चा: केंद्र सरकार लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।
- पर्यावरण और रोजगार सुरक्षा: लद्दाख के नाजुक पर्यावरण की रक्षा और स्थानीय युवाओं के लिए नौकरी के अवसरों पर ठोस नीति बनाने का भरोसा दिया गया है।
- पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश से बढ़ाकर पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को वार्ता के एजेंडे में शामिल किया गया है।
“लद्दाख के भविष्य की लड़ाई जारी रहेगी”
वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने देश भर से मिले भारी जनसमर्थन के लिए जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख की संस्कृति, हिमालयी पर्यावरण और वहां के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह अहिंसक आंदोलन जारी रहेगा। यदि दिसंबर में होने वाली बैठक में ठोस नतीजे नहीं निकले, तो लद्दाख की जनता फिर से शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी।
(Image Credit: abplive.com)






