मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने FCRA संशोधन नियम के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष सकारात्मक और रचनात्मक सुझाव रखे हैं। राज्य में सामाजिक तथा धर्मार्थ संस्थाओं के जनकल्याणकारी कार्यों को और अधिक सुचारू बनाने के लिए यह पहल की गई है।
सहकारी संघवाद और क्षेत्रीय विकास पर जोर
पूर्वोत्तर भारत में दूरदराज के क्षेत्रों तक विकास और सामाजिक सहायता पहुँचाने में गैर-सरकारी संगठनों एवं स्थानीय संस्थाओं की अहम भूमिका रही है। इस संदर्भ में वॉइस ऑफ मैनपुरी के विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, केंद्र सरकार भी वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखते हुए पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के कुछ प्रावधानों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाए, जिससे राष्ट्रहित और जनकल्याण में समर्पित संस्थाओं को प्रक्रियागत जटिलताओं से राहत मिल सके।
प्रस्ताव और सुधार के मुख्य बिंदु:
- प्रक्रियात्मक सरलीकरण: पारदर्शी रिकॉर्ड वाले सामाजिक और धार्मिक संगठनों के लिए FCRA पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाना।
- सीमावर्ती क्षेत्रों का कल्याण: दुर्गम जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और राहत कार्यों के निर्बाध संचालन को प्राथमिकता देना।
- पारदर्शिता और सुरक्षा: देश की सुरक्षा और पारदर्शिता से बिना कोई समझौता किए वास्तविक जनसेवा करने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहन देना।
केंद्र सरकार का पूर्वोत्तर के प्रति समर्पित दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुधारों के लिए ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत अभूतपूर्व काम किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और प्रशासन सदैव राज्यों के सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए नीतिगत चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए तत्पर रहता है। माना जा रहा है कि केंद्र और राज्य के बीच इस रचनात्मक बातचीत से मिजोरम में विकास और सामाजिक सेवाओं को एक नई दिशा मिलेगी।
(Image Credit: abplive.com)






