लखनऊ: जनेश्वर मिश्र पार्क के संरक्षण की मांग तेज़, नागरिक समूहों ने छेड़ा

लखनऊ: जनेश्वर मिश्र पार्क के संरक्षण की मांग तेज़, नागरिक समूहों ने छेड़ा #SaveJaneswarMishraPark अभियान

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क को बचाने की मांग एक बार फिर तेज़ हो गई है। स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों ने मिलकर #SaveJaneswarMishraPark अभियान शुरू किया है। उनका साफ कहना है— “Public parks are for people, not for destruction.” यानी सार्वजनिक पार्क लोगों के लिए होते हैं, विनाश के लिए नहीं।

लखनऊ का “ग्रीन लंग” जनेश्वर मिश्र पार्क, बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरण प्रेमियों ने संरक्षण की मांग उठाई

लगभग 376 एकड़ में फैला जनेश्वर मिश्र पार्क उत्तर भारत के सबसे बड़े शहरी पार्कों में गिना जाता है। इसे लखनऊ का “ग्रीन लंग” कहा जाता है, क्योंकि यह शहर की हवा को साफ रखने और तापमान संतुलित करने में अहम भूमिका निभाता है। रोज़ाना हजारों लोग यहां मॉर्निंग वॉक, योग, जॉगिंग और परिवार के साथ समय बिताने आते हैं।

लेकिन हाल के दिनों में बढ़ते शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों की आशंका ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।

“ग्रीन लंग” पर बढ़ता शहरी दबाव

नगर योजना विशेषज्ञों का कहना है कि लखनऊ जैसे तेज़ी से फैलते शहरों में खुले और हरित क्षेत्रों की संख्या लगातार घट रही है। नई सड़कें, व्यावसायिक प्रोजेक्ट और रियल एस्टेट विकास के चलते प्राकृतिक स्पेस सिमटते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जनेश्वर मिश्र पार्क जैसे बड़े हरित क्षेत्र भी निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियों की चपेट में आए, तो इसका सीधा असर शहर की वायु गुणवत्ता, भूजल स्तर और नागरिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा।

एक शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने बताया,

आज के समय में पार्क सिर्फ मनोरंजन स्थल नहीं हैं, बल्कि वे शहर की इकोलॉजिकल रीढ़ हैं। जनेश्वर मिश्र पार्क जैसे स्पेस को हर हाल में संरक्षित किया जाना चाहिए।

पर्यावरणविद बोले— पार्क सिर्फ हरियाली नहीं, सांस लेने की जगह है

पर्यावरणविदों का मानना है कि जनेश्वर मिश्र पार्क केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जल-धरती-हवा के बीच संतुलन बनाए रखने वाला प्राकृतिक सिस्टम है।

यह पार्क—

  • कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है
  • ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाता है
  • हीट आइलैंड इफेक्ट को कम करता है
  • बारिश के पानी को ज़मीन में समाने में मदद करता है
  • स्थानीय जैव विविधता को सहारा देता है

एक पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा,

“पार्क शहर की धड़कन है। इसे किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि या अवैध कब्ज़े से दूर रखना होगा।”


नागरिक समूहों की बैठक, संरक्षण की ठोस मांग

हाल ही में गोमती नगर और आसपास के इलाकों के नागरिकों ने बैठक कर पार्क की सुरक्षा को लेकर रणनीति बनाई। रेज़िडेंट वेलफेयर ग्रुप्स ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • पार्क की सीमा स्पष्ट रूप से चिन्हित की जाए
  • किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगे
  • नियमित वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग हो
  • जैव विविधता बढ़ाने के लिए देशी पौधे लगाए जाएं
  • जल संरक्षण योजनाओं को मजबूत किया जाए

नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इस हरित विरासत से वंचित हो सकती हैं।


जनेश्वर मिश्र की स्मृति से जुड़ा है पार्क

इस पार्क का निर्माण समाजवादी नेता छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र की स्मृति में किया गया था। वर्षों से यह पार्क सिविक प्लानिंग और अर्बन ग्रीन डेवलपमेंट का एक सफल मॉडल माना जाता रहा है।

यहां बनी झीलें, साइकिल ट्रैक, वॉकिंग पाथ और खुले लॉन न केवल नागरिकों को सुकून देते हैं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

शहर के कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जनेश्वर मिश्र पार्क जैसी परियोजनाएं देश के अन्य शहरों के लिए भी उदाहरण हो सकती हैं—बशर्ते इन्हें सही तरीके से संरक्षित किया जाए।


स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए अनिवार्य

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हरित क्षेत्रों की उपलब्धता सीधे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। खुले पार्क तनाव कम करते हैं, शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देते हैं और बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सभी के लिए उपयोगी होते हैं।

लखनऊ में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए जनेश्वर मिश्र पार्क जैसी जगहें और भी जरूरी हो गई हैं।

एक डॉक्टर के अनुसार,

“शहर में जितना ज्यादा हरित क्षेत्र होगा, उतनी ही बेहतर लोगों की सेहत होगी। पार्क खत्म होंगे तो बीमारियां बढ़ेंगी।”

सोशल मीडिया पर तेज़ हुआ #SaveJaneswarMishraPark नागरिकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी आवाज़ बुलंद करनी शुरू कर दी है। #SaveJaneswarMishraPark ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग पार्क की तस्वीरें साझा कर संरक्षण की अपील कर रहे हैं। कई युवाओं और छात्रों ने भी इस अभियान से जुड़ते हुए कहा है कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं।

भविष्य के लिए हरित विरासत बचाने की अपील

पर्यावरण विशेषज्ञों ने सरकार और नगर निगम से अपील की है कि जनेश्वर मिश्र पार्क को “नो-डेवलपमेंट ज़ोन” घोषित किया जाए और इसके रखरखाव के लिए अलग से स्थायी फंड बनाया जाए।

उनका कहना है कि आज लिया गया फैसला आने वाले दशकों तक शहर की दिशा तय करेगा।

जनेश्वर मिश्र पार्क सिर्फ लखनऊ का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का साझा संसाधन है। बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसे हरित क्षेत्रों का संरक्षण प्रशासन और नागरिकों—दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजधानी अपना “ग्रीन लंग” खो सकती है। #SaveJaneswarMishraPark सिर्फ एक हैशटैग नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाने की सामूहिक पुकार है।

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