लद्दाख के पर्यावरण और अधिकारों के लिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच महात्मा गांधी के पोते का बड़ा बयान आया है, जिन्होंने उपवास के वास्तविक महत्व को रेखांकित किया है।
सोनम वांगचुक के आंदोलन के बीच क्यों चर्चा में आए बापू के पोते?
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर प्रख्यात पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) पिछले कई दिनों से अनशन पर हैं। उनके इस कदम ने देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस बीच, वॉइस ऑफ मैनपुरी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने इस अनशन और ‘उपवास’ की परंपरा पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी अपने जीवन में उपवास का इस्तेमाल किस तरह और क्यों करते थे।
“उन्होंने उपवास का इस्तेमाल केवल…” – तुषार गांधी का बड़ा दावा
तुषार गांधी ने सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि बापू के लिए उपवास केवल एक राजनीतिक हथियार नहीं था। उन्होंने कहा:
- “बापू ने उपवास का इस्तेमाल केवल आत्म-शुद्धि (Self-Purification) और अंतरात्मा की आवाज पर समाज को जगाने के लिए किया था।”
- उपवास कभी भी किसी को डराने या ब्लैकमेल करने का जरिया नहीं होना चाहिए।
- गांधी जी का मानना था कि जब बातचीत के सारे रास्ते बंद हो जाएं, तभी उपवास को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाना चाहिए।
लद्दाख आंदोलन और सोनम वांगचुक की मांगें
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शून्य से नीचे के तापमान में लद्दाख की संवेदनशीलता को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि लद्दाख के पर्यावरण और वहां के आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा केवल छठी अनुसूची के जरिए ही संभव है। बापू के पोते के इस बयान को इस आंदोलन के नैतिक संदर्भ से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे इस सत्याग्रह को एक नई वैचारिक दिशा मिली है।
(Image Credit: abplive.com)






