मनरेगा पर भविष्य की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक, सरकार पर ‘जी राम जी अधिनियम’ के बहाने योजना खत्म करने का आरोप

नई दिल्ली:

मनरेगा पर भविष्य की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक, सरकार पर ‘जी राम जी अधिनियम’ के बहाने योजना खत्म करने का आरोप

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर चल रही सियासी जंग के बीच कांग्रेस ने शनिवार को अपनी शीर्ष नीति निर्धारक इकाई ‘कांग्रेस कार्यसमिति’ (CWC) की बैठक आयोजित की। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पारित ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ को मनरेगा कमजोर करने की साजिश बताते हुए आगे की राजनीतिक और कानूनी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई। कांग्रेस का आरोप है कि इस नए अधिनियम के माध्यम से न केवल मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने का रास्ता तैयार किया गया है, बल्कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर राष्ट्रपिता का अपमान भी किया गया है।

बैठक राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा भवन, कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की। इस दौरान कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, शशि थरूर सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य मौजूद रहे।

खड़गे ने बैठक की शुरुआत में कहा कि मनरेगा गरीबों, किसानों, छोटे मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा रही है। “यूपीए सरकार ने जब मनरेगा लागू किया था, तब उसका उद्देश्य था कि हर ग्रामीण परिवार को कम से कम 100 दिन का रोजगार मिले, ताकि भूख और बेरोजगारी कम हो। आज उसी योजना को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है,” खड़गे ने आरोप लगाया।

कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के नाम पर मनरेगा का चरित्र बदल दिया गया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि जब महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, तो यह सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि एक वैचारिक हमला है। कांग्रेस का तर्क है कि गांधीजी का नाम जुड़ने से योजना को सामाजिक न्याय और ग्रामीण सशक्तिकरण का स्वरूप मिला था, जिसे अब कमजोर किया जा रहा है।

बैठक में राहुल गांधी ने भी मनरेगा की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा कि यह योजना सिर्फ रोजगार देने की व्यवस्था नहीं, बल्कि देश के ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने का माध्यम रही है। उन्होंने दावा किया कि लाखों ग्रामीण परिवार ऐसे हैं जिनकी आजीविका का अहम साधन मनरेगा ही है। “जब-जब आर्थिक संकट आया है, मनरेगा ने ग्रामीण भारत को संभाला है। सरकार को इसे मजबूत करना चाहिए था, पर उल्टा इसे खत्म करने की कोशिश की जा रही है,” राहुल गांधी ने कहा।

सोनिया गांधी ने भी सरकार के कदम पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि गांधीजी के नाम को हटाना सिर्फ एक प्रतीकात्मक हमला नहीं है, बल्कि उनके विचारों को हाशिये पर धकेलने का प्रयास है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य मनरेगा के बजट में कटौती करना, भुगतान में देरी कराना और तकनीकी बदलाव के नाम पर ग्रामीण मजदूरों पर बोझ डालना है।

बैठक के दौरान कई राज्यों से आए नेताओं ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर मजदूरों को काम की मांग के बावजूद रोजगार नहीं दिया जा रहा, भुगतान में महीनों लग रहे हैं और कई लाभार्थियों के नाम तकनीकी कारण बताकर हटाए जा रहे हैं। इस पर कांग्रेस ने निर्णय लिया कि वह गांव-गांव जाकर मनरेगा से जुड़े वास्तविक आंकड़े जुटाएगी और जनता के बीच सरकार की नीतियों का विरोध करेगी।

कांग्रेस कार्यसमिति ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि मनरेगा में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले व्यापक सार्वजनिक विमर्श होना चाहिए। पार्टी ने मांग की कि संसद की स्थायी समिति के माध्यम से इस अधिनियम की समीक्षा की जाए और मजदूरों तथा पंचायत प्रतिनिधियों की राय शामिल की जाए।

जयराम रमेश ने कहा कि यूपीए सरकार के दौर में मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जान फूंकी थी। “आज वही योजना सरकार की नज़र में बोझ बन गई है। यह मानसिकता बताती है कि उनकी प्राथमिकता ग्रामीण गरीब नहीं, बल्कि केवल कॉरपोरेट जगत है,” उन्होंने तंज कसा।

बैठक समाप्त होने के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह मनरेगा को बचाने की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ेगी। पार्टी ने जनता से भी अपील की कि वे इस मसले पर अपनी आवाज बुलंद करें, क्योंकि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में मनरेगा को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होगा। कांग्रेस इसे अपने प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल कर चुकी है, जबकि सरकार अपने फैसले को विकास समर्थक बताकर बचाव में खड़ी है।

अंततः, इस बैठक का मूल संदेश यही रहा कि कांग्रेस मनरेगा को अपना राजनीतिक और सामाजिक एजेंडा बनाकर आगे बढ़ेगी और गांधीजी के नाम को हटाने के फैसले के खिलाफ एक व्यापक कैंपेन चलाएगी.

फोटो 1:
कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) बैठक के दौरान चर्चा करते कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी।
2: मनरेगा पर आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कार्यसमिति सदस्य।

 

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